Last updated: August 21st, 2026 at 02:18 pm

उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। राज्य के 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं और 80 हजार से अधिक लोगों पर इसका असर पड़ा है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। लगातार बारिश के कारण गंगा, यमुना, सरयू समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। नदियों के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है।
बाढ़ से प्रभावित जिलों में बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव शामिल बताए गए हैं। इन इलाकों में प्रशासन ने राहत एवं बचाव व्यवस्था को सक्रिय किया है।
प्रशासन के अनुसार हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों की व्यवस्था की गई है, जहां लोगों को भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मेडिकल टीमों को भी तैनात किया गया है।
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत और बचाव एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने के लिए नावों और अन्य साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता उन गांवों को सुरक्षित करना है जहां पानी तेजी से बढ़ रहा है।
प्रयागराज में भी गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। इसके साथ ही टोंस और बेलन नदियों के जलस्तर में वृद्धि से तटीय क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
प्रयागराज में संगम क्षेत्र भी बढ़ते पानी से प्रभावित हुआ है। नदी का पानी आसपास के निचले इलाकों तक पहुंचने लगा है। इससे घाटों और नदी किनारे होने वाली गतिविधियों पर असर पड़ा है। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति का जायजा ले रहा है।
वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे के क्षेत्रों में सावधानी बढ़ाई गई है। निचले इलाकों में पानी पहुंचने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन के लिए नदी का जलस्तर लगातार बढ़ना चिंता का विषय बना हुआ है।
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। 21 अगस्त को भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति और गंभीर होने का खतरा बना हुआ है।
बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति बनी हुई है। खेतों में पानी भरने से किसानों को भी नुकसान की चिंता सताने लगी है। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते पानी से फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। पानी जमा होने के कारण संक्रमण और जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी वजह से राहत शिविरों में साफ पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। नदी के बढ़े हुए पानी में जाने, बच्चों को नदी या बाढ़ के पानी के पास भेजने और बिजली के गीले उपकरणों को छूने से बचने की सलाह दी जा रही है।
अधिकारियों की नजर फिलहाल नदियों के जलस्तर और मौसम के अगले पूर्वानुमान पर है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो कुछ और इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
![]()
Comments are off for this post.