Last updated: August 21st, 2026 at 08:14 am

नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की E20 नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने की नीति का असर गन्ने की उपलब्धता पर पड़ा है, जिसका असर चीनी समेत कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि सरकार की E20 नीति का असर लोगों की रसोई और सड़क, दोनों पर पड़ रहा है। कांग्रेस का दावा है कि गन्ने और अनाज का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने से खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
चीनी और गुड़ की कीमतों का जिक्र
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि करीब 25 लाख टन चीनी के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला गन्ना इथेनॉल की ओर चला गया। उनके मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है और गुड़ के दाम भी बढ़े हैं।
उन्होंने चावल, मक्के के आटे और पशु आहार की कीमतों में वृद्धि का भी हवाला देते हुए सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए। हालांकि, इन कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सिर्फ E20 नीति को जिम्मेदार ठहराने वाले दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग आधिकारिक आंकड़ों से जरूरी होगी।
E20 पेट्रोल पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
जयराम रमेश ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण को लेकर वाहन मालिकों की चिंताओं का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ वाहनों में माइलेज और ईंधन की अनुकूलता को लेकर सवाल उठे हैं।
कांग्रेस का कहना है कि अगर इथेनॉल मिश्रण से ईंधन की लागत में कमी आती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें भी नीचे रहती हैं, तो पेट्रोल की कीमतों में इसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए।
कांग्रेस ने E20 नीति की समीक्षा की मांग की
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से E20 नीति की तत्काल समीक्षा करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि उपभोक्ताओं को ऐसे ईंधन विकल्प भी उपलब्ध होने चाहिए, जिनमें इथेनॉल मिश्रण अनिवार्य न हो।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और यात्रा के खर्च पर पड़ रहा है। कांग्रेस कार्यसमिति की हालिया बैठक में भी पार्टी ने E20 नीति से जुड़े माइलेज, वाहन अनुकूलता और पर्यावरण संबंधी मुद्दों को उठाने की बात कही है।
सरकार ने उठाया चीनी आयात का कदम
इस बीच चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शून्य शुल्क पर आयात की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना बताया गया है।
दिल्ली के बाजार में 21 अगस्त को चीनी की खुदरा कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। ऐसे में सरकार के आयात संबंधी फैसले से आने वाले दिनों में घरेलू बाजार की कीमतों पर क्या असर पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।
फिलहाल चीनी की महंगाई को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस E20 नीति को खाद्य महंगाई और उपभोक्ता समस्याओं से जोड़ रही है, वहीं सरकार की ओर से चीनी की उपलब्धता और कीमतों को संतुलित करने के लिए आयात का कदम उठाया गया है।
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