Last updated: July 22nd, 2026 at 03:41 pm

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने कथित तौर पर ATM और कैश डिपॉजिट मशीनों को तकनीकी तरीके से निशाना बनाने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। आरोपियों के पास से करीब चार लाख रुपये नकद, एक स्कॉर्पियो, एक सेंट्रो कार और साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जाने वाले कई तकनीकी उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस अब इस गिरोह के नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर ATM और कैश डिपॉजिट मशीनों की तकनीकी व्यवस्था में छेड़छाड़ करने के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल करते थे। जांच में स्मार्ट प्लग से जुड़े एक कथित तरीके की जानकारी सामने आई है, जिसके जरिए मशीनों के संचालन को प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी। पुलिस का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल कथित तौर पर मशीनों से अवैध रूप से नकदी निकालने के लिए किया जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने गाजियाबाद के अलावा किन-किन शहरों और राज्यों में ऐसी वारदातों को अंजाम दिया। पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है और इसमें तकनीकी विशेषज्ञों समेत अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब चार लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा एक स्कॉर्पियो और एक सेंट्रो कार भी जब्त की गई है। जांच अधिकारियों के अनुसार, वाहनों का इस्तेमाल कथित तौर पर वारदातों के दौरान आने-जाने और आरोपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। पुलिस ने कुछ इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी उपकरण भी बरामद किए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
जांच एजेंसियां बरामद उपकरणों के डेटा की भी जांच कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन उपकरणों से किन ATM या कैश डिपॉजिट मशीनों को निशाना बनाया गया था। इसके लिए विभिन्न स्थानों के CCTV फुटेज, ATM लेन-देन रिकॉर्ड और बैंकिंग डेटा की भी जांच की जा सकती है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, ATM और कैश डिपॉजिट मशीनों से जुड़े अपराधों में तकनीकी जानकारी का दुरुपयोग तेजी से चुनौती बन रहा है। अपराधी मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे मामलों में बैंकिंग संस्थानों के लिए अपने ATM नेटवर्क की नियमित सुरक्षा जांच और तकनीकी अपडेट करना बेहद जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। इसके साथ ही उनके बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अपराध से प्राप्त धन को किन खातों में जमा किया गया और क्या इसे आगे किसी अन्य नेटवर्क के माध्यम से ट्रांसफर किया गया।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों को ATM की तकनीकी जानकारी कहां से मिली। पुलिस इस संभावना की जांच कर रही है कि गिरोह में कोई ऐसा व्यक्ति शामिल था जिसे ATM या बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी जानकारी थी। यदि ऐसा कोई कनेक्शन सामने आता है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
इस मामले में पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसियां दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ भी संभावित जानकारी साझा कर सकती हैं, ताकि समान तरीके से हुई अन्य घटनाओं से इस गिरोह का संबंध स्थापित किया जा सके।
फिलहाल चारों आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और बरामद तकनीकी उपकरणों की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस गिरोह द्वारा कथित तौर पर की गई अन्य वारदातों और इनके नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।
गाजियाबाद में सामने आए इस मामले ने ATM और डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग संस्थानों और ग्राहकों दोनों को साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना होगा। वहीं, पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और इससे जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
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