Last updated: July 22nd, 2026 at 03:39 pm

उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में एक फ्लैट से करीब 2 करोड़ रुपये मूल्य की कैंसर और अन्य महंगी बायोलॉजिकल दवाएं बरामद होने के बाद हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई नोएडा के सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली प्रिंसली सोसाइटी के एक फ्लैट में की गई, जहां से बड़ी मात्रा में महंगी दवाएं मिलने के बाद एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बरामद दवाओं के स्रोत और उनके संभावित अवैध नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, फ्लैट का इस्तेमाल कथित तौर पर महंगी दवाओं को रखने और उनके वितरण से जुड़े काम के लिए किया जा रहा था। बरामद दवाओं में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के अलावा अन्य महंगी बायोलॉजिकल मेडिसिन भी शामिल बताई जा रही हैं। इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं एक निजी आवासीय परिसर से मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन दवाओं को वहां किस उद्देश्य से रखा गया था और इनके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था।
संयुक्त टीम ने छापेमारी के दौरान फ्लैट की तलाशी ली और वहां रखी दवाओं को जब्त किया। कार्रवाई के बाद एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ शुरू की गई है। जांच एजेंसियां अब आरोपी से यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि उसे ये दवाएं कहां से मिलीं और इन्हें आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद दवाएं वैध आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा थीं या उन्हें किसी अवैध तरीके से हासिल किया गया था। इसके लिए दवाओं के बैच नंबर, खरीद संबंधी दस्तावेज, बिल और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
जांच में कथित तौर पर दिल्ली के एक बड़े दवा नेटवर्क से संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है। इसके अलावा बिहार सरकार की दवा आपूर्ति व्यवस्था से किसी प्रकार का संबंध है या नहीं, इस पहलू की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। यदि जांच में सरकारी आपूर्ति से जुड़ी दवाओं के अवैध डायवर्जन की पुष्टि होती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या बरामद दवाओं को अवैध तरीके से बाजार में बेचने या निजी अस्पतालों और मरीजों तक पहुंचाने की योजना थी। कैंसर और गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं की कीमत काफी अधिक होती है। ऐसे में इनके अवैध कारोबार से न केवल आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि महंगी और जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि नकली, चोरी की या अवैध तरीके से प्राप्त दवाएं मरीजों तक पहुंचती हैं, तो उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए ऐसी दवाओं के भंडारण और वितरण की निगरानी के लिए कड़े नियमों का पालन आवश्यक है।
पुलिस और जांच एजेंसियां अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर सकती हैं। अधिकारियों को आशंका है कि यदि यह दवाओं के अवैध कारोबार का संगठित नेटवर्क है, तो इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसी वजह से दवाओं की खरीद से लेकर उनके संभावित वितरण तक की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है।
फिलहाल बरामद दवाओं का सत्यापन और उनके स्रोत की जांच जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का संचालन कितने समय से किया जा रहा था और अब तक कितनी दवाओं की अवैध खरीद-बिक्री की गई। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
नोएडा में हुई इस कार्रवाई ने महंगी जीवनरक्षक दवाओं की अवैध खरीद-बिक्री और आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि बरामद दवाएं किस स्रोत से आईं, उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था और इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं।
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