Last updated: October 28th, 2026 at 03:26 pm

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 की सुबह वायु प्रदूषण में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 7 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 228 पहुंच गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। एक दिन पहले मंगलवार को इसी समय शहर का AQI 167 था। यानी महज 24 घंटे में राजधानी की हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। प्रदूषण बढ़ने के साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 33 पर AQI 200 से ऊपर दर्ज किया गया। इनमें दो केंद्र ऐसे रहे जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार पहुंच गया। विवेक विहार में सबसे अधिक AQI 316 दर्ज किया गया, जबकि जहांगीरपुरी में यह 305 रहा। दोनों क्षेत्र ‘बेहद खराब’ वायु गुणवत्ता की श्रेणी में रहे। इसके अलावा नरेला में AQI 294, सोनिया विहार में 292 और सिरिफोर्ट में 290 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदूषण का असर राजधानी के कई हिस्सों में व्यापक रूप से महसूस किया जा रहा है।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई संभावित कारण माने जा रहे हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और ईंधन जलाने से पैदा होने वाले कण हवा को प्रदूषित करते हैं। मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषकों के फैलाव को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, केवल सुबह के AQI आंकड़ों के आधार पर बुधवार को प्रदूषण बढ़ने का कोई एक निश्चित कारण बताना संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न प्रदूषण स्रोतों और मौसम संबंधी आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण जरूरी है।
वायु गुणवत्ता में गिरावट के बीच दिल्ली-एनसीआर में पहले से लागू ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण के उपाय महत्वपूर्ण हो गए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर में GRAP के चरण-1 को लागू किया था। इसके तहत सड़कों की मशीनी सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने पर कार्रवाई जैसे उपाय किए जाते हैं। बुधवार को दिल्ली का औसत AQI 201 से 300 के बीच रहने के कारण खराब श्रेणी में था, जो चरण-1 के दायरे में आता है।
प्रदूषण का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास के शहरों में भी कई स्थानों पर हवा की गुणवत्ता खराब दर्ज की गई। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के कुछ निगरानी केंद्रों पर भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ रहा। नोएडा के सेक्टर-62 में AQI 314 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। इससे स्पष्ट है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक साझा क्षेत्रीय चुनौती बना हुआ है और इसे नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग शहरों में समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खराब हवा में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में परेशानी, खांसी, आंखों में जलन और गले में असहजता जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अस्थमा, हृदय रोग या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को भी प्रदूषण अधिक होने पर खुले में लंबे समय तक गतिविधियों से बचना चाहिए। जरूरत पड़ने पर बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है। सुबह और शाम के समय भारी व्यायाम खुले स्थानों पर करने के बजाय घर के भीतर करना बेहतर होगा।
दिल्ली में वायु प्रदूषण हर साल सर्दियों की शुरुआत के आसपास गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। इस दौरान वाहन उत्सर्जन, निर्माण संबंधी धूल, औद्योगिक गतिविधियां और क्षेत्रीय प्रदूषण स्रोत मिलकर हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी उपायों के साथ-साथ वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन, कचरा जलाने पर रोक और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
28 अक्टूबर की सुबह दर्ज AQI आंकड़े राजधानी में प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने का संकेत देते हैं। आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता मौसम और प्रदूषण स्रोतों के अनुसार बदल सकती है। ऐसे में नागरिकों को ताजा AQI पर नजर रखनी चाहिए और प्रशासन को प्रदूषण नियंत्रण के उपाय प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है।
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