Last updated: August 30th, 2026 at 02:34 pm

नई दिल्ली: दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। चुनाव आयोग की ओर से सोमवार को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जानी है, लेकिन इससे पहले करीब 47.6 लाख पंजीकृत मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं होने की आशंका जताई गई है। यह संख्या दिल्ली के कुल करीब 1.4 करोड़ पात्र मतदाताओं के लगभग एक-तिहाई के बराबर है।
रिपोर्ट के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 47.6 लाख मतदाता अपना enumeration form जमा नहीं कर पाए। इसी वजह से इन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखाई देने की संभावना है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि इन सभी मतदाताओं के नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद पात्र मतदाताओं को अपने नाम और विवरण की जांच करने तथा दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।
दिल्ली में 31 अगस्त से claims and objections की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे मतदाता जिनका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा प्रस्तुत कर सकेंगे। चुनाव प्रक्रिया में यह चरण महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि अंतिम मतदाता सूची तैयार करने से पहले नागरिकों को अपनी पात्रता साबित करने और रिकॉर्ड में सुधार कराने का अवसर दिया जाता है।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद संभावित गलतियों को दूर करना है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जाता है। चुनाव अधिकारियों की ओर से बूथ स्तर पर मतदाताओं से संपर्क और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया भी की जाती है।
दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में enumeration forms जमा नहीं होने के कारण अब ड्राफ्ट सूची पर विशेष नजर रहेगी। करीब 47.6 लाख नामों को लेकर सामने आई संख्या ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि चुनाव अधिकारियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वास्तविक पात्र मतदाता किसी तकनीकी या दस्तावेजी समस्या के कारण अंतिम सूची से बाहर न रह जाएं।
मतदाताओं को सलाह दी जा रही है कि ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद वे अपना नाम जरूर जांचें। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची में नहीं मिलता है तो उसे claims and objections प्रक्रिया के दौरान संबंधित चुनाव अधिकारी के सामने मामला उठाना चाहिए।
दिल्ली में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदान केंद्रों की संख्या में भी बदलाव किया गया है। पुनर्गठन के बाद राजधानी में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़कर 14,947 हो गई है। पहले दिल्ली में 13,033 मतदान केंद्र थे। चुनाव आयोग और प्रशासन की ओर से मतदान व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए यह पुनर्संरचना की गई है।
मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एक तरफ ऐसे लोगों के नाम हटाना जरूरी है जो पात्र नहीं हैं या जिनकी जानकारी गलत है, वहीं दूसरी तरफ किसी भी योग्य नागरिक का नाम गलती से हटना नहीं चाहिए। इसी कारण ड्राफ्ट सूची के बाद दावा और आपत्ति का चरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दिल्ली में SIR को लेकर पहले से राजनीतिक बहस भी चल रही है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इस अभ्यास में बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच हो रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के साथ-साथ नागरिक संगठनों की भी नजर ड्राफ्ट सूची पर रहेगी।
विशेष रूप से उन इलाकों में मतदाता सूची पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा जहां पिछले चुनावों में मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा था। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की 18 सबसे कम मतदान वाली विधानसभा सीटों में से 17 में मतदाता रिकॉर्ड का digitisation स्तर दिल्ली के औसत से कम था।
मतदाता सूची में नाम की जांच करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि केवल पुराने चुनाव में मतदान कर चुके होने से यह सुनिश्चित नहीं होता कि मौजूदा ड्राफ्ट सूची में नाम सही तरीके से दर्ज है। नागरिकों को अपने नाम, पता और अन्य विवरण की जांच करनी चाहिए और किसी भी गलती की स्थिति में निर्धारित समय के भीतर सुधार के लिए आवेदन करना चाहिए।
चुनाव अधिकारियों के सामने अब बड़ी चुनौती यह होगी कि लाखों संभावित रूप से छूटे हुए नामों से जुड़े दावों की जांच समय पर पूरी की जाए। इसके लिए बूथ स्तर के अधिकारियों और चुनावी प्रशासन को बड़ी संख्या में आवेदनों का निपटारा करना होगा।
ड्राफ्ट सूची अंतिम सूची नहीं होती। इसलिए 47.6 लाख मतदाताओं के नामों को लेकर सामने आया आंकड़ा संभावित exclusion को दर्शाता है, अंतिम रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या को नहीं। अंतिम मतदाता सूची तैयार होने से पहले दावे, आपत्तियां और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
दिल्ली में SIR के तहत तैयार की जा रही ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47.6 लाख पंजीकृत मतदाताओं के नाम छूटने की आशंका है। चुनाव आयोग सोमवार को ड्राफ्ट सूची जारी करेगा और 31 अगस्त से दावे एवं आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों के अनुसार ड्राफ्ट सूची अंतिम सूची नहीं है और पात्र मतदाताओं को अपना नाम शामिल कराने का अवसर मिलेगा।
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