Last updated: October 23rd, 2026 at 03:02 pm

दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कथित तौर पर 7.36 करोड़ रुपये की ठगी से जुड़े एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में एक निजी बैंक के शाखा प्रबंधक समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में 37 संदिग्ध बैंक खातों का पता चला, जिनका इस्तेमाल देशभर में दर्ज 99 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़ी रकम प्राप्त करने के लिए किए जाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, इन खातों में कुल लगभग 7.36 करोड़ रुपये जमा हुए थे। मामले की जांच अभी जारी है। <Cite refs={[“turn378427search0″,”turn378427search1”]}/>
पुलिस की जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया जा रहा था। ऐसे खातों को आम तौर पर म्यूल बैंक खाते कहा जाता है। इनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे भेजने के लिए किया जाता है, जिससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
जांच के दौरान निजी बैंक की सरस्वती विहार और त्रि नगर शाखाओं में खोले गए कुल 37 संदिग्ध खातों की पहचान की गई। इनमें सरस्वती विहार शाखा के 17 और त्रि नगर शाखा के 20 खाते शामिल बताए गए हैं। पुलिस को संदेह है कि इन खातों को खोलने और संचालित करने की प्रक्रिया में बैंक कर्मचारियों तथा अन्य आरोपियों की भूमिका रही।
मामले की शुरुआत एक संदिग्ध बैंक खाते की जांच से हुई। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला कि राहुल नाम का खाताधारक न तो संबंधित शाखा में गया था और न ही उसने खाता खोलने के लिए आवेदन किया था। इसके अलावा, कुछ अन्य खातों में दर्ज पतों का सत्यापन भी नहीं हो सका। इन अनियमितताओं के बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
जांच में मयंक कपूर उर्फ रिंकू नाम के व्यक्ति की भूमिका सामने आई। पुलिस का आरोप है कि वह दिहाड़ी मजदूरों को ऋण दिलाने का भरोसा देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, तस्वीरें और अन्य केवाईसी दस्तावेज हासिल करता था। कथित तौर पर इन दस्तावेजों का इस्तेमाल संबंधित व्यक्तियों की जानकारी या उपस्थिति के बिना बैंक खाते खुलवाने में किया गया।
पुलिस के मुताबिक, मयंक कपूर का संपर्क सरस्वती विहार शाखा के प्रबंधक शोभित अग्रवाल से हुआ। इसके बाद त्रि नगर शाखा के प्रबंधक सुशांत कुमार और कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। आरोप है कि आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया का पालन किए बिना खाते खोले गए और उनमें फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा।
पुलिस ने बताया कि 18 अक्टूबर को बैंक प्रबंधक शोभित अग्रवाल और बिक्री टीम से जुड़े चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले कथित नेटवर्क के संचालक मयंक कपूर को भी गिरफ्तार किया गया था। इस तरह मामले में कुल छह गिरफ्तारियां हुई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं और ठगी की रकम किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, सात चेकबुक, सात डेबिट कार्ड और 60 हजार रुपये नकद बरामद किए। इसके अलावा लगभग 150 ग्राम सोने के आभूषण भी जब्त किए गए। पुलिस को अलग-अलग व्यक्तियों के 63 आधार कार्ड, 60 पैन कार्ड और 55 पासपोर्ट आकार की तस्वीरें भी मिलीं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य बैंक खाते खोलने के लिए किया जा सकता था। <Cite refs={[“turn378427search0″,”turn378427search1”]}/>
इस मामले ने बैंकिंग व्यवस्था में केवाईसी सत्यापन और साइबर अपराध की रकम पर निगरानी की अहमियत को फिर उजागर किया है। बैंक खाताधारकों को अपने पहचान दस्तावेज अनजान व्यक्तियों के साथ साझा करने से बचना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को कमीशन के बदले अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे खातों का इस्तेमाल अवैध लेनदेन में हो सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को अपने बैंक खाते के गलत इस्तेमाल का संदेह हो, तो उसे तुरंत बैंक और संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए। साइबर ठगी का शिकार होने पर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की जा सकती है। दिल्ली पुलिस मामले में वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। आगे की जांच से नेटवर्क के अन्य संभावित सदस्यों और ठगी की रकम के पूरे लेनदेन का पता लगने की उम्मीद है।
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