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दिल्ली में SIR से पहले 11 लाख मतदाताओं के नाम हटे, कई लोगों को जानकारी तक नहीं मिली

  दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद के बीच एक
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    दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद के बीच एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच दिल्ली की मतदाता सूची से करीब 11 लाख नाम हटाए गए। यह संख्या उस अवधि में दिल्ली के कुल मतदाताओं का लगभग 7.07 प्रतिशत थी। खास बात यह है कि कई मतदाताओं को अपने नाम हटाए जाने की जानकारी तब मिली, जब SIR प्रक्रिया शुरू हुई और उन्हें अपने परिवार के अन्य सदस्यों की तरह Enumeration Form नहीं मिला।

    आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2025 में दिल्ली की मतदाता सूची में करीब 1.56 करोड़ मतदाता दर्ज थे। जून 2026 तक यह संख्या घटकर लगभग 1.45 करोड़ रह गई। यानी SIR की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही लगभग 11 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो चुके थे। यह बदलाव उस अवधि में हुआ जब दिल्ली की मतदाता सूची फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद और जून 2026 में SIR शुरू होने से पहले अलग-अलग चरणों में अपडेट की गई थी।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन नामों के हटने की जानकारी संबंधित मतदाताओं को कितनी मिली। राजधानी के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले कई लोगों ने बताया कि उन्हें यह पता ही नहीं था कि उनका नाम मतदाता सूची से हट चुका है। SIR शुरू होने के बाद जब परिवार के दूसरे सदस्यों को फॉर्म मिला और किसी व्यक्ति को फॉर्म नहीं मिला, तब उन्हें समस्या का पता चला। कुछ मामलों में मतदाताओं को दोबारा नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए Form 6 भरने की सलाह दी गई।

    उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मुबारकपुर डबास की रहने वाली पूजा देवी ने बताया कि उनके परिवार के बाकी सदस्यों को SIR का फॉर्म मिला, लेकिन उन्हें फॉर्म नहीं मिला। जब उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि उनका नाम पहले ही सूची से हट चुका है और अब उन्हें नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा। रिपोर्ट के अनुसार पूजा पहले 2020 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान कर चुकी थीं।

    आदर्श नगर के निवासी बलजिंदर कुमार ने भी ऐसी ही स्थिति की जानकारी दी। उनके अनुसार वह लंबे समय से उसी पते पर रह रहे हैं और कई वर्षों से उस क्षेत्र के मतदाता रहे हैं, लेकिन अब उनका नाम सूची में नहीं दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि दोबारा Form 6 के जरिए पंजीकरण कराने का मतलब यह स्वीकार करना होगा कि वह पहले मतदाता नहीं थे। ऐसे मामलों ने मतदाता सूची में रिकॉर्ड की शुद्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    हालांकि दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इन लगभग 11 लाख नामों को हटाए जाने को चुनावी प्रक्रिया में होने वाले नियमित संशोधनों और बूथ लेवल अधिकारियों से जुड़ी संभावित गलतियों से जोड़ा है। अधिकारियों के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ना और हटाना एक निरंतर प्रक्रिया है। मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों, डुप्लीकेट प्रविष्टियों और अन्य पात्र श्रेणियों के मामलों में रिकॉर्ड अपडेट किए जाते हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इतनी बड़ी संख्या असामान्य जरूर है, लेकिन इसका कारण नियमित पुनरीक्षण प्रक्रिया हो सकता है।

    यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR के पहले चरण में दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से लगभग 47.5 से 48 लाख नाम बाहर किए गए हैं। 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में लगभग 1.45 करोड़ मतदाताओं में से करीब एक-तिहाई नाम शामिल नहीं थे। इनमें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं से जुड़ी श्रेणियां शामिल हैं।

    इसी बीच कई लोगों ने शिकायत की है कि वे जीवित हैं, उसी पते पर रह रहे हैं और मतदान भी कर चुके हैं, फिर भी उन्हें SIR ड्राफ्ट सूची में मृत या अन्य श्रेणी में डाल दिया गया। ऐसे मामलों को लेकर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में नागरिक समूहों ने जनसुनवाई भी आयोजित की है।

    निर्वाचन विभाग ने ऐसे मतदाताओं को अपना नाम दोबारा जांचने और गलती होने पर सुधार कराने का अवसर दिया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची उपलब्ध है, जहां मतदाता EPIC नंबर, नाम या मोबाइल नंबर के जरिए अपना रिकॉर्ड खोज सकते हैं। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली में मतदाता सूची की पारदर्शिता और रिकॉर्ड की सटीकता को लेकर बहस तेज कर दी है। प्रशासन के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से बाहर न हों और जिन नामों को नियमों के तहत हटाया गया है, उनकी प्रक्रिया भी स्पष्ट और सत्यापन योग्य रहे। आने वाले हफ्तों में दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद ही यह साफ होगा कि ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए कितने नाम अंतिम मतदाता सूची में वापस जुड़ते हैं।

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