Last updated: August 17th, 2026 at 05:06 pm

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लग्जरी कारों की चोरी और उनकी अवैध तरीके से बिक्री से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और कई चोरी की लग्जरी कारें बरामद की हैं। जांच में इस नेटवर्क के दिल्ली से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों और म्यांमार सीमा तक फैले होने की बात सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक यह गिरोह दिल्ली और आसपास के इलाकों से महंगी गाड़ियों को चोरी करता था। इसके बाद वाहनों की पहचान बदलने के लिए उनके चेसिस और इंजन नंबरों में कथित तौर पर छेड़छाड़ की जाती थी। चोरी की गाड़ियों को नए दस्तावेज और नंबर प्लेट के जरिए वैध वाहन के तौर पर दिखाने की कोशिश की जाती थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह का नेटवर्क केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था। चोरी की गई गाड़ियों को अलग-अलग राज्यों के रास्ते पूर्वोत्तर भारत तक पहुंचाया जाता था। वहां से उन्हें म्यांमार सीमा की ओर भेजे जाने की आशंका है। इससे मामले में अंतरराज्यीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई के दौरान पांच चोरी की कारें बरामद किए जाने की जानकारी दी है। बरामद वाहनों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे कहां से चोरी किए गए थे और उन्हें किस रास्ते से दूसरे स्थानों तक पहुंचाया गया।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि चोरी की गाड़ियों को कौन लोग उपलब्ध कराते थे, उनके फर्जी दस्तावेज कौन तैयार करता था और अंतिम खरीदारों तक वाहन कैसे पहुंचते थे।
ऐसे मामलों में वाहन के chassis number और engine number बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। यदि इनमें बदलाव किया जाता है तो मूल वाहन की पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। इसलिए पुलिस बरामद वाहनों की तकनीकी जांच के जरिए उनकी वास्तविक पहचान और पुराने रिकॉर्ड का मिलान कर सकती है।
फर्जी दस्तावेज भी इस तरह के नेटवर्क का अहम हिस्सा हो सकते हैं। वाहन की registration details, ownership papers और अन्य दस्तावेजों की जांच करके पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि चोरी के बाद उन्हें किस तरह बाजार में दोबारा पेश किया गया।
लग्जरी कारों की चोरी में electronic security systems भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आधुनिक वाहनों में keyless entry और electronic ignition जैसी सुविधाओं के कारण अपराधी तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए सटीक तरीके की पूरी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
जांच एजेंसियां अब गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और डिजिटल संपर्कों की भी जांच कर सकती हैं। इससे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और चोरी की गाड़ियों की आवाजाही से जुड़े लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली से पूर्वोत्तर राज्यों तक वाहनों को पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए गए रास्तों की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि कई चोरी की गाड़ियां एक ही route से भेजी गई थीं तो पुलिस उस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंच सकती है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि इस गिरोह ने अब तक कितनी गाड़ियां चोरी कीं और उनमें से कितनी को दूसरे राज्यों या सीमा पार भेजा गया।
इस कार्रवाई के बाद दिल्ली में महंगी कारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वाहन मालिकों के लिए अपने वाहन के registration documents सुरक्षित रखना, tracking devices और अन्य सुरक्षा सुविधाओं का इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है।
हालांकि जांच अभी जारी है और गिरफ्तार आरोपियों पर लगे आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही इस नेटवर्क के वास्तविक आकार और उसके अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर पांच चोरी की गाड़ियां बरामद की हैं और ऐसे नेटवर्क का पता लगाया है जो दिल्ली से पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते म्यांमार सीमा तक सक्रिय होने की आशंका है। अब पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी दस्तावेजों और चोरी की गाड़ियों के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
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