Last updated: September 1st, 2026 at 02:58 pm

बिहार में किसानों को खाद खरीदने के लिए लंबी कतारों और दुकानों के चक्कर से राहत देने के लिए राज्य सरकार ने उर्वरक वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। 1 सितंबर 2026 से राज्य के 19 जिलों में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था शुरू की गई है। नई व्यवस्था के तहत किसान खाद की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे और अधिकृत विक्रेता से QR कोड के जरिए उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य खाद वितरण को अधिक पारदर्शी बनाना और कालाबाजारी, जमाखोरी तथा निर्धारित कीमत से अधिक वसूली जैसी शिकायतों पर रोक लगाना है।
नई व्यवस्था के तहत किसानों को खाद लेने के लिए पहले डिजिटल माध्यम से अपनी आवश्यकता दर्ज करनी होगी। ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसान को QR कोड उपलब्ध कराया जाएगा। इसी QR कोड के आधार पर अधिकृत विक्रेता से निर्धारित मात्रा में खाद प्राप्त की जा सकेगी। इससे खाद की बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज होगा और यह पता लगाना आसान होगा कि किस किसान को कितनी मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया गया है।
कृषि विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था का पहला चरण 19 जिलों में लागू किया गया है। सरकार इसे धीरे-धीरे पूरे बिहार में लागू करने की तैयारी कर रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 2 अक्टूबर से राज्यभर में डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य किसानों को खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता देना है।
बिहार में खेती के मौसम के दौरान उर्वरक की मांग काफी बढ़ जाती है। विशेष रूप से यूरिया, डीएपी और अन्य प्रमुख उर्वरकों की मांग बढ़ने पर कई बार बिक्री केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। किसानों को कई घंटे इंतजार करना पड़ता है और कुछ स्थानों पर खाद की उपलब्धता को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए सरकार इस समस्या को कम करने की कोशिश कर रही है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड बनने से खाद की वास्तविक बिक्री पर नजर रखना आसान होगा। यदि किसी विक्रेता द्वारा निर्धारित मात्रा से अधिक खाद बेचने, कालाबाजारी करने या अनधिकृत तरीके से बिक्री करने की कोशिश की जाती है तो डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से उसकी पहचान की जा सकती है। इससे प्रशासन को निगरानी और कार्रवाई में मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था किसानों के लिए भी कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहले खाद लेने के लिए किसानों को सीधे बिक्री केंद्र पर पहुंचना पड़ता था। वहां उपलब्धता के आधार पर उन्हें खाद मिलती थी। अब ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मिलने से किसानों को अपनी जरूरत पहले से दर्ज करने का विकल्प मिलेगा। QR कोड आधारित वितरण से यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सही किसान को खाद मिले।
हालांकि डिजिटल व्यवस्था को सफल बनाने के लिए किसानों और खाद विक्रेताओं को इसके इस्तेमाल की जानकारी देना भी जरूरी होगा। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, किसानों और विक्रेताओं को नई प्रणाली के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे उन किसानों को विशेष रूप से मदद मिलेगी जो स्मार्टफोन या ऑनलाइन सेवाओं का नियमित इस्तेमाल नहीं करते हैं।
कृषि विभाग का लक्ष्य केवल ऑनलाइन बुकिंग शुरू करना नहीं है, बल्कि खाद की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को अधिक व्यवस्थित करना भी है। उपलब्ध स्टॉक, बिक्री और किसानों तक पहुंचने वाली मात्रा की निगरानी डिजिटल माध्यम से करने पर प्रशासन को खाद की मांग और उपलब्धता के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिल सकती है।
नई व्यवस्था के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी रहेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, स्मार्टफोन की उपलब्धता और डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी सभी किसानों के लिए समान नहीं है। इसलिए ऑफलाइन सहायता केंद्रों और स्थानीय कृषि अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि किसी किसान को ऑनलाइन बुकिंग या QR कोड से संबंधित समस्या आती है तो उसे स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
सरकार की कोशिश है कि खाद की बिक्री में पारदर्शिता बढ़े और किसानों को सही समय पर निर्धारित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध हो। यदि डिजिटल व्यवस्था सफल रहती है तो इससे खाद की कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर नियंत्रण लगाने में मदद मिल सकती है।
बिहार में 1 सितंबर से शुरू हुई यह व्यवस्था फिलहाल 19 जिलों में लागू की गई है। आने वाले समय में इसके विस्तार के बाद राज्य के अन्य जिलों के किसान भी डिजिटल माध्यम से खाद की बुकिंग और QR कोड आधारित खरीद की सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे।
बिहार में 1 सितंबर 2026 से 19 जिलों में खाद वितरण की नई डिजिटल व्यवस्था शुरू हो गई है। अब किसान ऑनलाइन उर्वरक बुक कर सकेंगे और QR कोड के माध्यम से अधिकृत विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का लक्ष्य खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के साथ किसानों को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना है।
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