Last updated: November 7th, 2026 at 03:34 pm

बिहार की राजधानी पटना में सरकारी कंपनी बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड (बेल्ट्रॉन) के बैंक खाते से 2.72 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने कंपनी के नाम पर नकली चेकबुक तैयार कर 56 क्लोन चेक के माध्यम से खाते से बड़ी रकम निकाल ली। हैरानी की बात यह है कि लगातार लेनदेन होने के बावजूद बैंक को काफी समय तक इसकी भनक नहीं लगी। मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन ने शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस और साइबर अपराध से जुड़ी एजेंसियां अब पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बेल्ट्रॉन ने अप्रैल 2026 में बैंक से नई चेकबुक जारी करने का अनुरोध किया था। बैंक की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी की असली चेकबुक नागपुर स्थित एक अधिकृत प्रिंटिंग एजेंसी में तैयार कराई गई। इसके बाद चेकबुक को स्पीड पोस्ट के माध्यम से बेल्ट्रॉन के पंजीकृत पते पर भेजा गया था। इसी प्रक्रिया के दौरान जालसाजों ने कथित तौर पर चेकबुक से संबंधित जानकारी हासिल कर ली और उसी चेक नंबर का इस्तेमाल करके नकली चेक तैयार कर लिए।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कानपुर की एक प्रिंटिंग प्रेस से नकली चेकबुक छपवाई थी। इन चेकों पर कानपुर की प्रिंटिंग प्रेस का नाम भी अंकित था। जालसाजों ने बेल्ट्रॉन के खाते से जुड़े विवरण और वास्तविक चेक नंबरों का इस्तेमाल करते हुए क्लोन चेक तैयार किए। इसके बाद अलग-अलग चेक के माध्यम से खाते से रकम निकालने का सिलसिला शुरू हुआ।
मामले का खुलासा 31 अक्टूबर को हुआ, जब बैंक की जांच के दौरान एक चेक पर कानपुर की प्रिंटिंग प्रेस का नाम देखकर संदेह हुआ। बैंक अधिकारियों ने चेक की प्रामाणिकता की जांच शुरू की। इसके बाद खाते से हुए पुराने लेनदेन की भी पड़ताल की गई। जांच में पता चला कि फर्जी चेक के जरिए अब तक कुल 56 बार भुगतान किया जा चुका था और निकाली गई रकम लगभग 2.72 करोड़ रुपये थी।
इसके बाद बैंक ने 4 नवंबर को सभी 56 चेक की प्रतियां निकालीं और उन खातों का विवरण जुटाया, जिनमें धोखाधड़ी की रकम भेजी गई थी। संबंधित दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी पुलिस को सौंप दी गई। बैंक प्रबंधक के बयान के आधार पर पटना के शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस अब उन बैंक खातों की पहचान कर रही है, जिनके माध्यम से रकम निकाली या स्थानांतरित की गई।
इस घटना ने बैंकिंग व्यवस्था में चेक सत्यापन और भुगतान सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर बड़ी रकम के भुगतान से पहले चेक की प्रामाणिकता, हस्ताक्षर और खाते से जुड़ी जानकारियों का सत्यापन किया जाता है। ऐसे में 56 क्लोन चेक के माध्यम से इतनी बड़ी रकम का भुगतान हो जाना जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जालसाजों को बेल्ट्रॉन की असली चेकबुक और चेक नंबरों की जानकारी कैसे मिली। यह भी जांच की जा रही है कि चेकबुक की छपाई और डिलीवरी के दौरान किसी स्तर पर जानकारी लीक हुई थी या फिर किसी अन्य माध्यम से आरोपियों ने कंपनी के बैंकिंग विवरण हासिल किए थे।
पुलिस उन सभी खाताधारकों और संदिग्ध लेनदेन की भी जांच कर रही है, जिनके माध्यम से 2.72 करोड़ रुपये की रकम पहुंची। आशंका है कि इस धोखाधड़ी में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी आरोपी की भूमिका या पूरे नेटवर्क के बारे में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
बेल्ट्रॉन बिहार सरकार की महत्वपूर्ण तकनीकी संस्था है, जो विभिन्न सरकारी विभागों को इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है। ऐसे में सरकारी कंपनी के खाते से इतनी बड़ी रकम की कथित धोखाधड़ी सामने आना वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला है।
अब पुलिस और बैंक प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती धोखाधड़ी में शामिल लोगों की पहचान करना, रकम की बरामदगी करना और यह पता लगाना है कि भुगतान सत्यापन की प्रक्रिया में कहां चूक हुई। जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस मामले में जालसाजों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की लापरवाही भी जिम्मेदार थी या नहीं।
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