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यूपी MLC चुनाव में भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला, 11 सीटों के नतीजों ने बढ़ाई 2027 की राजनीतिक हलचल

  उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई
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    उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए द्विवार्षिक चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को मतगणना के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। शुरुआती नतीजों में भाजपा ने बढ़त बनाई, जबकि सपा ने भी महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। इन चुनावों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

     

    विधान परिषद की इन 11 सीटों में पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। मतगणना 27 अक्टूबर से शुरू हुई और इसके परिणाम 28 अक्टूबर को भी सामने आते रहे। निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं ने उम्मीदवारों के चयन में अहम भूमिका निभाई। इन चुनावों के नतीजों से राजनीतिक दलों को अपने संगठन, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और मतदाता संपर्क अभियान का आकलन करने का अवसर मिला है।

     

    28 अक्टूबर को उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा पांच सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी थी, जबकि समाजवादी पार्टी ने तीन सीटें अपने नाम की थीं। शेष तीन सीटों पर मतगणना जारी होने की जानकारी सामने आई। भाजपा ने मेरठ स्नातक, मेरठ शिक्षक, लखनऊ शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। पार्टी ने इन नतीजों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी।

     

    भाजपा के उम्मीदवारों में दिनेश कुमार गोयल ने मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में उमेश द्विवेदी ने लखनऊ, श्रीचंद शर्मा ने मेरठ और हरि सिंह ढिल्लों ने बरेली-मुरादाबाद सीट पर विजय हासिल की। इन परिणामों ने पार्टी को शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने का संकेत दिया। भाजपा नेतृत्व ने हालांकि यह भी स्वीकार किया कि पार्टी को कुछ सीटों पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी और परिणामों की समीक्षा की जाएगी।

     

    दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने भी महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं। पार्टी के लाल बिहारी यादव ने वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत दर्ज की। आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में डॉ. आकाश अग्रवाल ने भाजपा के उम्मीदवार को हराया, जबकि प्रयागराज-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मान सिंह यादव ने जीत हासिल की। इन परिणामों से सपा को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर मिला।

     

    वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा की जीत को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है। यहां पार्टी की सफलता ने विपक्ष को भाजपा के खिलाफ अपनी रणनीति को लेकर नए सिरे से उत्साहित होने का अवसर दिया। सपा नेतृत्व ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान मतगणना में कथित देरी और पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठाए। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के रिकॉर्ड और आधिकारिक प्रक्रिया को देखना आवश्यक है।

     

    आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी मतगणना के दौरान विवाद की खबरें सामने आईं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पार्टी उम्मीदवार डॉ. आकाश अग्रवाल के साथ दुर्व्यवहार हुआ और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग सहित संबंधित संस्थाओं से मामले का संज्ञान लेने की मांग की। इन आरोपों के बीच चुनाव परिणाम और उम्मीदवारों की शिकायतें राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी रहीं।

     

    गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी मतगणना को लेकर विवाद सामने आया। उम्मीदवारों ने मतों के अंतर और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। अधिकारियों ने कहा कि मतगणना निर्धारित नियमों के अनुसार कराई जा रही है। ऐसी स्थिति में किसी भी आरोप की पुष्टि आधिकारिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।

     

    राजनीतिक दृष्टि से इन चुनावों का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा के लिए अपने पारंपरिक मतदाता आधार को मजबूत बनाए रखना चुनौती है, जबकि सपा विपक्षी समर्थन को व्यापक बनाने की कोशिश कर रही है। विधान परिषद चुनाव विधानसभा चुनावों का सीधा परिणाम नहीं बताते, लेकिन वे दलों के संगठन और कुछ खास मतदाता समूहों के बीच समर्थन का संकेत जरूर देते हैं।

     

    28 अक्टूबर को उपलब्ध नतीजों में भाजपा आगे रही, जबकि समाजवादी पार्टी ने भी कई महत्वपूर्ण सीटें जीतकर मुकाबले को दिलचस्प बनाया। शेष सीटों के परिणाम और मतगणना से जुड़े विवादों पर निर्वाचन अधिकारियों की अंतिम जानकारी इस चुनाव की पूरी तस्वीर स्पष्ट करेगी।

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