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लखनऊ में आतंकी साजिश नाकाम, यूपी ATS ने पंजाब के तीन युवकों को किया गिरफ्तार; एक नाबालिग भी हिरासत में

  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सेना
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    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सेना या पुलिस के जवान को निशाना बनाने की कथित साजिश का खुलासा किया है। एटीएस ने 30 अक्टूबर को पंजाब के तीन युवकों को गिरफ्तार किया, जबकि एक 17 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये सभी पाकिस्तान में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर लखनऊ में किसी सेना या पुलिसकर्मी की हत्या करने अथवा पुलिस प्रतिष्ठान पर हमला करने की योजना बना रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों के पास से एक विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए गए हैं।

     

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एटीएस को खुफिया जानकारी मिली थी कि पंजाब के कुछ युवक प्रतिबंधित शाहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में हैं और उन्हें भारत में किसी सुरक्षा प्रतिष्ठान या पुलिस-सेना के जवान को निशाना बनाने का निर्देश दिया गया है। इस सूचना के आधार पर एटीएस ने जांच शुरू की और संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर राणा भाई के संपर्क में थे और उसके निर्देश पर लखनऊ पहुंचे थे।

     

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गगनदीप सिंह (26), रजत कुमार (19) और कृष (21) के रूप में हुई है। तीनों पंजाब के रहने वाले बताए गए हैं। इनके साथ पकड़ा गया चौथा व्यक्ति नाबालिग है, जिसकी पहचान कानूनी प्रावधानों के तहत सार्वजनिक नहीं की गई है। एटीएस के मुताबिक, आरोपियों ने 27 अक्टूबर को अमृतसर से यात्रा शुरू की थी। वे दिल्ली के रास्ते होते हुए 29 अक्टूबर की आधी रात के आसपास लखनऊ पहुंचे थे।

     

    जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों को कथित तौर पर निर्देश दिया गया था कि वे किसी सेना या पुलिसकर्मी की हत्या करें और पूरी घटना का वीडियो बनाकर अपने हैंडलर को भेजें। इसका उद्देश्य लोगों के बीच डर पैदा करना बताया गया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों को इस काम के लिए तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था। उन्हें वारदात के बाद नेपाल भाग जाने का निर्देश भी दिया गया था, ताकि गिरफ्तारी से बच सकें।

     

    एटीएस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए अपने कथित विदेशी हैंडलर से संपर्क में थे। जांचकर्ताओं के अनुसार, यात्रा के खर्च के लिए उन्हें 2,585 रुपये भेजे गए थे। लखनऊ पहुंचने के बाद रहने और अन्य खर्चों के लिए भी अलग-अलग किस्तों में पैसे भेजे जाने का दावा किया गया है। अधिकारियों ने आरोपियों के मोबाइल फोन से संदिग्ध बातचीत, वीडियो और कुछ ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड मिलने की बात कही है, जिनकी जांच की जा रही है।

     

    एटीएस का दावा है कि आरोपियों ने लखनऊ रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर अपने हैंडलर को भेजा था। इसके अलावा, उनके मोबाइल फोन में कुछ संवेदनशील प्रतिष्ठानों की कथित रेकी से जुड़ी जानकारी भी मिली है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने किन स्थानों की जानकारी जुटाई थी और क्या इस नेटवर्क के अन्य सदस्य भी लखनऊ या उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में सक्रिय हैं।

     

    हथियारों की बरामदगी भी इस मामले का अहम पहलू है। एटीएस के मुताबिक, आरोपियों को बताया गया था कि हथियार और कारतूस पाकिस्तान से भेजे गए हैं और लखनऊ में नेटवर्क से जुड़ा एक स्थानीय व्यक्ति उन्हें उपलब्ध कराएगा। जांचकर्ताओं का दावा है कि शहर पहुंचने के बाद आरोपियों को इसी स्थानीय संपर्क के माध्यम से पिस्टल और कारतूस मिले। अब एजेंसी उस व्यक्ति की पहचान करने और हथियारों की आपूर्ति के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

     

    इस मामले में लखनऊ स्थित एटीएस थाने में भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के अनुसार, आरोपियों से आगे पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी जाएगी। जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन, स्थानीय सहयोगियों और कथित विदेशी संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है।

     

    मामले में सामने आए आरोप एटीएस की प्रारंभिक जांच और अधिकारियों के बयानों पर आधारित हैं। अदालत में आरोपों की पुष्टि और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा। इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और हथियारों की आपूर्ति करने वालों की तलाश में जुटी हैं।

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