Last updated: October 31st, 2026 at 02:36 pm

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने मुंबई के रहने वाले एक कथित तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से सात दुर्लभ बाज (फाल्कन) बरामद किए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन संरक्षित पक्षियों को उत्तर प्रदेश के जंगलों से पकड़कर मुंबई के रास्ते दुबई, सऊदी अरब और बहरीन जैसे खाड़ी देशों में भेजा जाता था। इस कार्रवाई के बाद अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की जांच तेज कर दी गई है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान फिरोज मसर्रत खान के रूप में हुई है। वह मुंबई के भायखला इलाके का निवासी बताया गया है। STF को 30 अक्टूबर को सूचना मिली थी कि मुंबई का एक व्यक्ति प्रतिबंधित पक्षियों के साथ लखनऊ पहुंचने वाला है। इस जानकारी के आधार पर STF ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की टीम के साथ मिलकर कार्रवाई की। शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात बजे लखनऊ के मदेयगंज थाना क्षेत्र के इरादतनगर मोहल्ले में एक मकान पर छापा मारकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
तलाशी के दौरान उसके कब्जे से सात दुर्लभ बाज, एक मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार, बरामद पक्षी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित श्रेणी में आते हैं। इनका अवैध शिकार, कब्जा और व्यापार कानूनन अपराध है। बरामद पक्षियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में अनुमानित कीमत 1.40 करोड़ रुपये, जबकि अन्य में 14 करोड़ रुपये बताई गई है। इसलिए वास्तविक मूल्य की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह संरक्षित पक्षियों और वन्यजीवों की तस्करी करने वाले गिरोह का सदस्य है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क के सदस्य उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर के जंगलों से दुर्लभ पक्षियों को पकड़ते थे। इसके बाद उन्हें अलग-अलग माध्यमों से लखनऊ और मुंबई तक पहुंचाया जाता था। मुंबई से इन पक्षियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजने की व्यवस्था की जाती थी।
जांच में दुबई, सऊदी अरब और बहरीन जैसे देशों में पक्षियों की सप्लाई किए जाने की आशंका सामने आई है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में स्थानीय शिकारी, परिवहन करने वाले लोग, बिचौलिए और विदेशी खरीदार कौन-कौन शामिल हैं। अधिकारियों को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपी केवल इस पूरे नेटवर्क की एक कड़ी हो सकता है। उसके मोबाइल फोन की जांच से दूसरे आरोपियों और संभावित खरीदारों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
इस कार्रवाई में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। WCCB देश में वन्यजीवों के अवैध व्यापार और तस्करी पर नियंत्रण के लिए काम करता है। STF और WCCB की संयुक्त कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि दुर्लभ पक्षियों की तस्करी केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों और विदेशों तक जुड़े हो सकते हैं।
गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ मदेयगंज थाने में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 49, 50 और 51 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत संरक्षित वन्यजीवों के अवैध शिकार, कब्जे और व्यापार से संबंधित कार्रवाई की जा सकती है। आगे की कानूनी प्रक्रिया स्थानीय पुलिस द्वारा की जाएगी। STF की टीम गिरोह के अन्य सदस्यों और पक्षियों को जंगलों से पकड़ने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है।
वन्यजीवों की तस्करी जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा है। दुर्लभ पक्षियों को प्राकृतिक आवास से निकालकर अवैध बाजार में बेचना उनकी आबादी को नुकसान पहुंचा सकता है। इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए जंगलों में निगरानी, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी है।
लखनऊ में हुई इस कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। सात दुर्लभ बाजों की बरामदगी को बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश तभी संभव होगा जब एजेंसियां इसके अन्य सदस्यों, स्थानीय संपर्कों और विदेशी खरीदारों तक पहुंच सकेंगी।
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