Last updated: October 31st, 2026 at 02:34 pm

उत्तर प्रदेश और बिहार के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क के नॉर्दर्न कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में इसकी जानकारी दी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत दिल्ली से शुरू होने वाला हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या होते हुए वाराणसी, पटना, सिलीगुड़ी और गुवाहाटी तक पहुंचेगा। परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर भारत के कई प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रस्तावित नॉर्दर्न कॉरिडोर देश के परिवहन नेटवर्क में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य आधुनिक हाई-स्पीड रेल तकनीक के माध्यम से प्रमुख शहरों को जोड़ना और यात्रियों को तेज तथा सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध कराना है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत दिल्ली और वाराणसी के बीच यात्रा का समय कम होना है। रेल मंत्री के अनुसार, प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से दिल्ली से वाराणसी की दूरी लगभग 3 घंटे 33 मिनट में पूरी की जा सकेगी। वर्तमान में सामान्य ट्रेनों से इस यात्रा में काफी अधिक समय लगता है। ऐसे में यह परियोजना व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के लिए दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
रेल मंत्री ने विभिन्न शहरों के बीच प्रस्तावित यात्रा समय की जानकारी भी साझा की। उनके अनुसार, दिल्ली से आगरा का सफर लगभग 59 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। दिल्ली से कानपुर पहुंचने में करीब 1 घंटा 45 मिनट और दिल्ली से लखनऊ जाने में लगभग 2 घंटे 12 मिनट लगेंगे। वहीं, लखनऊ से वाराणसी की यात्रा करीब 1 घंटा 21 मिनट में पूरी हो सकेगी। वाराणसी से प्रयागराज के बीच यात्रा का अनुमानित समय केवल 33 मिनट बताया गया है।
इस हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से बिहार को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित मार्ग में वाराणसी से पटना की यात्रा लगभग एक घंटे में पूरी होने का अनुमान है। इससे उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच व्यापारिक गतिविधियों, पर्यटन और व्यावसायिक संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है। आगे यह कॉरिडोर सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक विस्तारित होगा, जिससे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी भी मजबूत हो सकती है।
परियोजना का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी जैसे प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक केंद्रों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने से पर्यटकों की आवाजाही आसान हो सकती है। वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं को दिल्ली, आगरा और लखनऊ जैसे शहरों से तेज संपर्क मिलेगा। इसी तरह अयोध्या और प्रयागराज की यात्रा करने वाले लोगों को भी बेहतर परिवहन विकल्प मिलने की संभावना है।
रेल मंत्री ने यह भी कहा कि बुलेट ट्रेन का किराया हवाई यात्रा की तुलना में किफायती रखने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इसे केवल उच्च आय वर्ग तक सीमित न रखकर मध्यम वर्ग, युवाओं, छोटे कारोबारियों और आम यात्रियों के लिए भी उपयोगी बनाना है। उन्होंने इस परियोजना को लंबे समय तक देश की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को गति देने वाला कदम बताया।
हालांकि, अभी इस कॉरिडोर के विस्तृत रूट, निर्माण लागत, भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख और पूरा होने की समयसीमा जैसी जानकारियां सामने आना बाकी हैं। रेल मंत्री द्वारा बताए गए यात्रा समय प्रस्तावित अनुमान हैं, इन्हें अभी नियमित ट्रेन सेवा का समय नहीं माना जा सकता।
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की मंजूरी उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घोषणा है। यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के प्रमुख शहरों के बीच दूरी और यात्रा का समय दोनों काफी कम हो सकते हैं। इससे पर्यटन, व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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