Last updated: September 17th, 2026 at 09:31 am

श्रीनगर में 17 साल पुराने एक मामले में अदालत ने चार आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। स्पेशल कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा और जांच व सबूतों में कई अहम कमियां सामने आईं।
मामला सदर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 254/2009 से जुड़ा था। इसमें क्रॉस-LoC व्यापार के जरिए कथित तौर पर धन जुटाने, आपराधिक साजिश और प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा को फंडिंग से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
बरी किए गए आरोपियों में मुशफिक अहमद लोन, विपिन कुमार शर्मा, संजीव कुमार टंडन और जहूर अहमद डार शामिल हैं। एक अन्य आरोपी सूरज प्रकाश बड्याल की 2024 में मौत के बाद उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई थी।
अदालत ने कहा कि अभियोजन का मामला मुख्य रूप से कथित खुलासे वाले बयानों, बरामदगी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड पर आधारित था। लेकिन कथित धन हस्तांतरण का कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं मिला और बैंक खातों, व्यापार रजिस्टर या अन्य दस्तावेजों से कथित मनी ट्रेल भी स्थापित नहीं हो सकी।
फैसले में बरामदगी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। अदालत ने पाया कि स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी नहीं थी, जब्त नकदी को उचित तरीके से सील नहीं किया गया था और ग्रेनेड की आवश्यक फोरेंसिक जांच भी नहीं कराई गई। गवाहों के बयानों में गिरफ्तारी और बरामदगी को लेकर विरोधाभास भी सामने आए।
अदालत ने यह भी माना कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड को पेश करने के लिए जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गई थीं। इसके अलावा, UAPA के तहत आवश्यक मंजूरी से संबंधित दस्तावेज और संबंधित अधिकारी की गवाही भी अभियोजन पक्ष की ओर से साबित नहीं की गई।
इन कमियों के आधार पर कोर्ट ने चारों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही, अदालत ने ₹13.85 लाख की जब्त रकम को संबंधित लोगों या उनके कानूनी वारिसों को वापस करने का निर्देश दिया, बशर्ते अपील की अवधि और किसी अन्य कानूनी रोक का पालन किया जाए।
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