Last updated: July 3rd, 2026 at 08:01 am

बिहार में विद्यालयी शिक्षा के विकास और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र से 1120 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का अनुरोध किया है। इस संबंध में बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर विभिन्न योजनाओं के लिए सहयोग मांगा।
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार के ‘सात निश्चय-3 (2025-30) – उन्नत शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य’ कार्यक्रम और समग्र शिक्षा अभियान के तहत कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें 542 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) के विद्यार्थियों के लिए विशेष यूनिफॉर्म, 1068 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा प्रयोगशालाओं की स्थापना, 2577 आईसीटी लैब और 2522 स्मार्ट क्लास विकसित करने की योजना शामिल है।
इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण कार्यक्रम, बालिकाओं के लिए रोबोटिक्स और कोडिंग गतिविधियां, पारंपरिक कला आधारित उद्यमिता प्रशिक्षण, प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए ‘खेल पिटारा’ किट तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में जेंडर एवं इक्विटी से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया।
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल संसाधनों के विस्तार और विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र का सहयोग बेहद आवश्यक है। उन्होंने विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे बिहार की विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राज्य सरकार के प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए उन्हें गंभीरता से विचार करने और आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने बिहार में शिक्षा सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।
राज्य सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के लागू होने से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण वातावरण, तकनीक आधारित शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिससे बिहार के शिक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
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