Last updated: July 3rd, 2026 at 03:54 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना, व्यापार एवं निवेश बढ़ाना तथा रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को नई गति देना है। यह यात्रा भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यात्रा का पहला पड़ाव इंडोनेशिया होगा, जहां प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा प्रधानमंत्री योग्याकार्ता भी जाएंगे, जहां भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने का कार्यक्रम है।
इसके बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ से होगी। दोनों नेता रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), ऊर्जा, शिक्षा, नई तकनीक और आर्थिक साझेदारी पर चर्चा करेंगे। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के नेताओं से भी प्रधानमंत्री के मिलने की संभावना है। दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को देखते हुए इस बैठक को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
यात्रा का अंतिम चरण न्यूज़ीलैंड होगा। यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि लगभग 40 वर्षों बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूज़ीलैंड की आधिकारिक यात्रा करेगा। प्रधानमंत्री मोदी वहां अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि, शिक्षा, निवेश और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। हाल के वर्षों में भारत ने इस क्षेत्र के देशों के साथ रक्षा, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। ऐसे में यह दौरा भारत की विदेश नीति के व्यापक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। इन देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा के लिए लाभदायक हो सकते हैं। साथ ही, नई तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की सक्रिय कूटनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत किया है। इस दौरे से व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सभी की नजर इस यात्रा के दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकों और संभावित समझौतों पर है। यदि प्रस्तावित एजेंडे पर सकारात्मक प्रगति होती है, तो भारत के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिल सकती है। यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिए वर्ष 2026 की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्राओं में से एक माना जा रहा है।
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