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35 साल पुराने विस्फोट मामले में पूर्व सांसद सूरजभान सिंह समेत तीनों आरोपित बरी, अदालत ने साक्ष्य को माना अपर्याप्त

बेगूसराय की एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट ने करीब 35 वर्ष पुराने चर्चित विस्फोट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व सांसद
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बेगूसराय की एमपी/एमएलए स्पेशल कोर्ट ने करीब 35 वर्ष पुराने चर्चित विस्फोट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व सांसद सूरजभान सिंह, भाजपा नेता राम लखन सिंह और ललन सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका, इसलिए तीनों आरोपितों को संदेह का लाभ दिया गया।

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    यह फैसला एडीजे-2 सह एमपी/एमएलए स्पेशल जज ब्रजेश कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में तीनों आरोपितों को उनके बंधपत्रों से भी मुक्त कर दिया।

    यह मामला वर्ष 1991 में बरौनी थाना क्षेत्र में हुए एक विस्फोट से जुड़ा था। घटना के बाद दर्ज शिकायत में गोहाल में हुए धमाके से संपत्ति को नुकसान और एक व्यक्ति के घायल होने की बात कही गई थी। हालांकि बाद में पुलिस जांच के दौरान शिकायतकर्ता राम लखन सिंह, पूर्व सांसद सूरजभान सिंह और ललन सिंह को ही आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया।

    लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद वर्ष 2018 में अदालत ने तीनों के खिलाफ हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और विस्फोटक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें अदालत के समक्ष प्रस्तुत कीं।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मामले में ठोस और विश्वसनीय प्रमाणों का अभाव है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने तीनों आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया।

    फैसले के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष फैसला दिया है। उल्लेखनीय है कि यह निर्णय केवल इस विशेष विस्फोट मामले तक सीमित है और इसका अन्य किसी कानूनी मामले पर स्वतः कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

     

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