Last updated: July 7th, 2026 at 10:52 am

उत्तर प्रदेश में 12 जुलाई को प्रस्तावित 35 करोड़ पौधों के महावृक्षारोपण अभियान को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार के इस अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे “वृक्षारोपण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार रोपण अभियान” करार दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार नए पौधे लगाने का दावा कर रही है, लेकिन पहले लगाए गए पौधों की देखरेख और उनकी वास्तविक स्थिति पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अभियान के नाम पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है।
सपा प्रमुख ने दावा किया कि यदि प्रत्येक पौधे पर औसतन 10 रुपये की अनियमितता होती है, तो 35 करोड़ पौधों के लक्ष्य के साथ लगभग 350 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार की संभावना बन सकती है। हालांकि, उन्होंने अपने इस आरोप के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया।
वहीं, राज्य सरकार ने 12 जुलाई को होने वाले महावृक्षारोपण अभियान की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में अभियान की समीक्षा बैठक में सभी सांसदों, विधायकों, महापौरों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसे जनभागीदारी का अभियान बनाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार के अनुसार इस अभियान में सबसे अधिक 15.50 करोड़ पौधे वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग लगाएगा। इसके अलावा ग्राम्य विकास विभाग 10 करोड़, कृषि विभाग 3.25 करोड़, उद्यान विभाग 1.50 करोड़ और पंचायती राज विभाग 1.22 करोड़ पौधे लगाएंगे। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे भी बड़े स्तर पर पौधरोपण की योजना तैयार की गई है।
वन विभाग का कहना है कि अभियान के लिए राज्यभर की करीब दो हजार नर्सरियों में 52.44 करोड़ पौधे तैयार किए गए हैं। सरकार इसे पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तर प्रदेश अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बता रही है।
अब इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर सरकार इसे पर्यावरण संरक्षण का ऐतिहासिक अभियान बता रही है, वहीं विपक्ष इसकी पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर सवाल उठा रहा है।
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