Last updated: July 12th, 2026 at 06:50 pm

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों में सीटों के समन्वय, संयुक्त प्रचार अभियान, संगठनात्मक मजबूती और चुनावी रणनीति को लेकर विस्तार से चर्चा की जा रही है। गठबंधन के नेताओं का कहना है कि एनडीए पूरी एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा।
हाल ही में हुई समन्वय बैठक में नेताओं ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाने पर विशेष जोर दिया। सभी सहयोगी दलों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखें और संयुक्त कार्यक्रमों के माध्यम से जनता तक पहुंचें। बैठक में यह भी तय किया गया कि चुनाव की घोषणा से पहले विभिन्न जिलों में संयुक्त जनसभाएं और कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
एनडीए नेताओं का कहना है कि गठबंधन सरकार द्वारा किए गए विकास कार्य, सड़क और पुल निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार तथा केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को चुनाव प्रचार का प्रमुख आधार बनाया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं, महिलाओं, किसानों और लाभार्थियों से सीधे संवाद स्थापित करने की रणनीति भी तैयार की गई है।
दूसरी ओर महागठबंधन ने एनडीए की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जनता इस बार विकास, रोजगार, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर मतदान करेगी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुनाव से पहले केवल राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं एनडीए नेताओं का कहना है कि जनता उनके विकास कार्यों पर भरोसा करती है और चुनाव में इसका सकारात्मक परिणाम मिलेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना एनडीए के लिए सबसे बड़ी चुनौती और ताकत दोनों होगी। भाजपा और जदयू के बीच बेहतर समन्वय, सहयोगी दलों की भूमिका और सीटों के बंटवारे पर समय रहते सहमति चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसी कारण गठबंधन के शीर्ष नेता लगातार संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से सभी सहयोगियों के बीच संवाद बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में चुनावी मुकाबला इस बार काफी रोचक रहने की संभावना है। एक ओर एनडीए विकास और सरकारी योजनाओं के आधार पर जनता के बीच जाएगा, जबकि विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी।
एनडीए ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पूरी तैयारी और एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा। संयुक्त प्रचार अभियान, संगठनात्मक बैठकों और कार्यकर्ता सम्मेलनों के माध्यम से गठबंधन अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। अब सभी की नजर आगामी राजनीतिक बैठकों और सीटों के समन्वय पर रहेगी, जो बिहार विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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