Last updated: July 13th, 2026 at 02:24 pm

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को उपराष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) और सैनिक स्कूलों की गतिविधियों एवं प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उन्हें एनसीसी और सैनिक स्कूलों से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों, प्रशिक्षण व्यवस्था और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। बैठक में युवाओं के व्यक्तित्व विकास, राष्ट्रीय एकता और अनुशासन को मजबूत बनाने में एनसीसी की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई।
बैठक के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि एनसीसी केवल एक प्रशिक्षण संस्था नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि एनसीसी के माध्यम से लाखों युवा अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने “एक भारत श्रेष्ठ भारत” के अंतर्गत संचालित कैडेट एक्सचेंज कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलती है।
उपराष्ट्रपति ने एनसीसी द्वारा चलाए जा रहे सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों की भी प्रशंसा की। उन्होंने नशा मुक्त भारत अभियान, स्वच्छ भारत अभियान और अन्य सामाजिक जागरूकता अभियानों में कैडेटों की सक्रिय भागीदारी को उल्लेखनीय बताया। उनके अनुसार, ऐसे कार्यक्रम युवाओं में सेवा भावना विकसित करते हैं और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के विकास में युवाओं की भागीदारी जितनी अधिक होगी, भारत उतनी ही तेजी से आगे बढ़ेगा।
बैठक में सैनिक स्कूलों की कार्यप्रणाली, शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि सैनिक स्कूलों में आधुनिक शिक्षा के साथ नेतृत्व क्षमता, शारीरिक दक्षता और नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन संस्थानों का उद्देश्य छात्रों को केवल सशस्त्र बलों के लिए ही नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए भी तैयार करना है।
उपराष्ट्रपति ने हाल ही में गठित एनसीसी एलुमनाई एसोसिएशन का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूर्व कैडेटों का अनुभव वर्तमान कैडेटों के लिए प्रेरणादायक होगा और इससे संगठन को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने पूर्व एनसीसी कैडेटों से समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने का भी आह्वान किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे युवा देश में एनसीसी और सैनिक स्कूलों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ये संस्थान युवाओं में नेतृत्व, अनुशासन, टीमवर्क और संकट प्रबंधन जैसी क्षमताओं का विकास करते हैं। साथ ही प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक अभियानों और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में एनसीसी कैडेटों की भागीदारी उन्हें समाज से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती है।
बैठक के अंत में उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एनसीसी और सैनिक स्कूल आने वाले वर्षों में देश के युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए और अधिक सक्षम बनाएंगे। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों से इन संस्थानों को आधुनिक संसाधनों और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य करने का आग्रह किया। सरकार का उद्देश्य युवाओं को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे अनुशासन, नेतृत्व और सेवा भावना के साथ देश के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें।
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