Last updated: July 19th, 2026 at 03:10 pm

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस ने एक बड़े अभियान के तहत अंतरराज्यीय वाहन चोरी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और आसपास के राज्यों से दोपहिया एवं चारपहिया वाहन चोरी कर उन्हें फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बेचने का काम करता था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई चोरी के वाहन, फर्जी नंबर प्लेट, वाहन पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इसके नेटवर्क की जांच जारी है।
मेरठ पुलिस को पिछले कुछ समय से वाहन चोरी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) और सर्विलांस टीम का गठन किया गया। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने गिरोह के सदस्यों की पहचान की और कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। अभियान के दौरान मुख्य आरोपियों सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह चोरी किए गए वाहनों के इंजन और चेसिस नंबर बदलकर उन्हें दूसरे राज्यों में बेच देता था। कुछ वाहनों को कबाड़ के रूप में काटकर उनके पुर्जे भी बेचे जाते थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क कितना बड़ा है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में मोटरसाइकिल, कारें, फर्जी नंबर प्लेट, मोबाइल फोन और वाहन चोरी में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण भी बरामद किए हैं। बरामद वाहनों का रिकॉर्ड विभिन्न राज्यों के पुलिस डेटाबेस से मिलाया जा रहा है ताकि उनके वास्तविक मालिकों की पहचान कर उन्हें वाहन वापस सौंपे जा सकें।
मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि वाहन चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पूरे जिले में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों, हाईवे और संवेदनशील क्षेत्रों में वाहनों की सघन जांच की जा रही है। साथ ही लोगों से भी अपील की गई है कि वे अपने वाहनों में आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराज्यीय वाहन चोरी गिरोह आधुनिक तकनीक और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अपराध को अंजाम देते हैं। ऐसे में राज्यों के बीच बेहतर पुलिस समन्वय, तकनीकी निगरानी और डिजिटल वाहन रिकॉर्ड का उपयोग इन गिरोहों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बेहद आवश्यक है। उनका मानना है कि समय-समय पर चलाए जाने वाले विशेष अभियान ऐसे संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और जांच पूरी होने के बाद कई और खुलासे हो सकते हैं। पुलिस ने विश्वास दिलाया है कि वाहन चोरी और संगठित अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा तथा कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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