Last updated: July 21st, 2026 at 03:44 pm

दिल्ली में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के ‘चलो संसद’ मार्च के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद अब कानूनी कार्रवाई और आरोप-प्रत्यारोप के दौर में पहुंच गया है। सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और तोड़फोड़ के मामलों को लेकर दिल्ली पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस अब घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। दूसरी ओर, प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के कारण राजधानी में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमाया हुआ है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा राजधानी के जंतर-मंतर क्षेत्र में एकत्र हुए थे। इसके बाद संसद की ओर मार्च करने की कोशिश के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई। पुलिस का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने जरूरत से अधिक बल का इस्तेमाल किया। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
इस बीच प्रदर्शन से जुड़ी एक गंभीर खबर सामने आई है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान घायल हुई एक 20 वर्षीय युवती ICU में भर्ती है। रिपोर्ट में बताया गया कि सोमवार को घायल हुए करीब 90 छात्रों में से मंगलवार सुबह तक 79 को अस्पतालों से छुट्टी दी जा चुकी थी। घायल युवती की स्थिति को लेकर अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी जारी है। घटना के बाद प्रदर्शन में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल और अधिक गंभीर हो गए हैं।
पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा और वाहनों को नुकसान पहुंचाने के मामलों को लेकर चार एफआईआर दर्ज की हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिनकी भूमिका कथित तौर पर हिंसक घटनाओं में रही। पुलिस का कहना है कि कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, CJP और प्रदर्शन से जुड़े समर्थकों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की गई और पुलिस की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शन के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रखने की बात कही है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े हुए हैं। प्रदर्शन का मुद्दा अब व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बनता जा रहा है और विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए छात्रों और युवाओं को कानूनी सहायता देने की पेशकश की है। इससे यह मामला राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का केंद्र बन गया है।
दिल्ली पुलिस ने घटनाक्रम के बाद राजधानी के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है। संसद भवन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ के एक हिस्से की गतिविधियां किस तरह हिंसक हुईं और इसके पीछे कोई सुनियोजित रणनीति थी या नहीं।
CJP आंदोलन को लेकर स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई है। एक ओर पुलिस एफआईआर और जांच के माध्यम से कथित हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है, वहीं प्रदर्शनकारी आंदोलन जारी रखने और अपनी मांगों को उठाने की बात कह रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान घायल लोगों की स्थिति, पुलिस कार्रवाई की जांच और दर्ज एफआईआर पर आने वाले दिनों में आगे की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। राजधानी में प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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