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मानसून सत्र के पहले दिन संसद में हंगामा, विपक्ष ने NEET और CJP प्रदर्शन समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे और विरोध प्रदर्शन के
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संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे और विरोध प्रदर्शन के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगते हुए सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया। हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और अंततः दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। मानसून सत्र की शुरुआत से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव का माहौल देखने को मिला, जिससे आने वाले दिनों में भी सदन के भीतर तीखी बहस के संकेत मिल रहे हैं।

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    सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही को सार्थक और रचनात्मक बनाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है और यहां देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर तथ्यपूर्ण चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा करें और संसद के समय का अधिकतम उपयोग करें।

    हालांकि सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विपक्षी सांसदों ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। विशेष रूप से NEET से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष का आरोप है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में सरकार को सदन में विस्तृत जवाब देना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

    विपक्ष ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले को भी सदन में उठाया। विपक्षी सांसदों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। सरकार की ओर से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग को लेकर भी सदन में राजनीतिक बहस तेज रही।

    इसी दौरान दिल्ली में CJP के ‘चलो संसद’ मार्च और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी विपक्ष ने उठाया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया। उन्होंने सरकार से प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने और हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

    वहीं सत्ता पक्ष के सांसदों ने विपक्ष के आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही को बाधित करने के बजाय महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि किसी भी प्रकार के प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और यदि किसी व्यक्ति ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    लगातार हंगामे के कारण पीठासीन अधिकारियों ने कई बार सदन को व्यवस्थित करने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। सांसदों के लगातार विरोध और नारेबाजी के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही को पहले कुछ समय के लिए स्थगित किया गया। बाद में जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और अंततः दिनभर के लिए सदन स्थगित कर दिया गया।

    मानसून सत्र की शुरुआत जिस तरह से हंगामे के साथ हुई है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस हो सकती है। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह NEET, शिक्षा व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाएगा। वहीं सरकार ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलाने में सहयोग करने की अपील की है।

    कुल मिलाकर संसद के मानसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक टकराव और हंगामे के बीच बीता। अब सभी की नजरें अगले कार्यदिवस पर हैं, जहां विपक्ष एक बार फिर अपने मुद्दों को जोरदार तरीके से उठा सकता है और सरकार की ओर से भी इन मामलों पर जवाब दिए जाने की संभावना है। संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी या राजनीतिक गतिरोध जारी रहेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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