Last updated: July 28th, 2026 at 10:14 am

लोकसभा में मंगलवार को एंटी पेपर लीक (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से विधेयक पेश करते हुए कहा कि परीक्षा पत्र लीक की घटनाएं पहले भी होती रही हैं और नए संशोधनों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
सरकार के पक्ष में बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान हुई पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख किया और कहा कि मौजूदा संशोधन परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल सजा बढ़ाने से शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर के छात्र बेहतर शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं। उनके अनुसार, छात्रों की नाराजगी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को दर्शाती है।
चर्चा के दौरान गोगोई ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कई छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान किया जाना चाहिए और प्रदर्शनकारियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि एजेंसी में अधिकारियों के बदलाव और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार NTA के शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही तय करने से बच रही है।
गौरव गोगोई ने यह भी कहा कि वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में कई आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जिससे मौजूदा कानून की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। उनके अनुसार, केवल कानून में संशोधन करने के बजाय परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना अधिक आवश्यक है।
लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा जारी है। सरकार का कहना है कि संशोधित कानून से पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगेगी, जबकि विपक्ष का दावा है कि केवल कानूनी प्रावधानों को कठोर बनाने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
![]()
Comments are off for this post.