Last updated: August 1st, 2026 at 11:50 am

सुप्रीम कोर्ट ने भीड़ नियंत्रण के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा है कि जब तक मौजूदा दिशा-निर्देश सुरक्षा एजेंसियों को विशेष परिस्थितियों में इसके उपयोग की अनुमति देते हैं, तब तक इस पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में पेलेट गन के गलत इस्तेमाल के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी अलग-अलग जांच की जा सकती है।
यह टिप्पणी दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से पेलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार को जंतर-मंतर पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के गोला-बारूद से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता पेलेट गन के इस्तेमाल को पूरी तरह असंवैधानिक मानते हैं, तो उन्हें उन नियमों और दिशानिर्देशों को चुनौती देनी होगी जो विशेष परिस्थितियों में इसके उपयोग की अनुमति देते हैं। केवल किसी एक घटना के आधार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान धातु के पेलेट का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई लोगों को चोटें आईं। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पेलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े सभी नियम और आदेश रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें।
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार मामले में आवश्यक सभी जानकारियां उपलब्ध कराएगी और सुनवाई में पूरा सहयोग करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही अदालत ने कहा कि संबंधित घटनाओं की जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
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