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504 प्राथमिक स्कूलों में 18 से 21 अगस्त तक सावधिक आकलन, बच्चों की सीखने की क्षमता पर होगी जांच

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के नूंह जिले में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान 504 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों का सावधिक आकलन-1
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दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के नूंह जिले में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान 504 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों का सावधिक आकलन-1 आयोजित किया जा रहा है। यह आकलन 18 अगस्त से 21 अगस्त तक चलेगा। इसमें बालवाटिका-III से लेकर कक्षा चार तक के विद्यार्थियों की शैक्षणिक दक्षताओं का मूल्यांकन किया जाएगा। आकलन का उद्देश्य केवल बच्चों को अंक देना नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक सीखने की स्थिति को समझना और कमजोर क्षेत्रों की पहचान करना है।

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    शिक्षा विभाग के अनुसार, इस आकलन में विद्यार्थियों की लिखित और मौखिक दोनों तरह की क्षमताओं को परखा जाएगा। मूल्यांकन के दौरान यह देखने की कोशिश की जाएगी कि बच्चे अपने स्तर के अनुसार पढ़ने, सुनने, बोलने और लिखने में कितने सक्षम हैं। इससे शिक्षकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन विद्यार्थियों को अतिरिक्त अभ्यास और शैक्षणिक सहायता की जरूरत है।

    इस बार आकलन में अंग्रेजी भाषा को भी शामिल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, विद्यार्थियों की भाषाई दक्षताओं को अलग-अलग स्तर पर जांचने का प्रयास किया जा रहा है। इससे बच्चों की सीखने की प्रगति का अधिक व्यापक आकलन किया जा सकेगा।

    कक्षा तीन के विद्यार्थियों के लिए हिंदी में मौखिक पठन प्रवाह यानी Oral Reading Fluency का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके तहत बच्चों की सुनने, बोलने और पढ़ने की क्षमता पर ध्यान दिया जाएगा। शिक्षक यह देखेंगे कि विद्यार्थी लिखित सामग्री को कितनी सहजता से पढ़ पाते हैं और उसे समझकर बोल या जवाब दे पाते हैं।

    कक्षा चार में हिंदी का मूल्यांकन लिखित और मौखिक, दोनों रूपों में किया जाएगा। लिखित परीक्षा में श्रुतलेख और लेखन से जुड़ी दक्षताओं को जांचा जाएगा। वहीं मौखिक परीक्षा में विद्यार्थियों की सुनने, बोलने और पढ़ने की क्षमता का आकलन किया जाएगा। इस तरह बच्चों की भाषा से संबंधित विभिन्न क्षमताओं को अलग-अलग स्तर पर समझने की कोशिश की जाएगी।

    आकलन को लेकर शिक्षकों को भी पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षक निपुण हरियाणा टीचर ऐप की कंटेंट रिपॉजिटरी में उपलब्ध अभ्यास प्रश्न-पत्रों और शिक्षक मार्गदर्शिका का अध्ययन करेंगे। इससे शिक्षकों को मूल्यांकन की प्रक्रिया और विद्यार्थियों की दक्षताओं को समझने में सहायता मिलेगी।

    आकलन का समय भी स्कूल की व्यवस्था के अनुसार निर्धारित किया गया है। सामान्य स्कूलों में परीक्षा सुबह 9 बजे से 11 बजे तक आयोजित की जाएगी। वहीं दोहरी पाली में संचालित होने वाले स्कूलों में आकलन दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक कराया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्कूलों के नियमित संचालन को प्रभावित किए बिना विद्यार्थियों का मूल्यांकन पूरा करना है।

    आकलन के बाद विद्यार्थियों के प्रदर्शन का रिकॉर्ड ऐप पर दर्ज किया जाएगा। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से बच्चों की शैक्षणिक प्रगति को व्यवस्थित तरीके से देखा जा सकेगा। भविष्य में इसी जानकारी के आधार पर विद्यार्थियों की कमजोरियों को दूर करने के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक रणनीति तैयार की जा सकती है।

    शिक्षा विभाग का जोर इस बात पर है कि मूल्यांकन को केवल परीक्षा या अंकों तक सीमित न रखा जाए। बच्चों के सीखने के वास्तविक स्तर को समझना इसका मुख्य उद्देश्य है। यदि किसी विद्यार्थी को पढ़ने, लिखने या भाषा समझने में परेशानी है तो शिक्षक उस क्षेत्र में अतिरिक्त अभ्यास करा सकेंगे।

    प्राथमिक स्तर पर बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमताएं मजबूत करना आगे की पढ़ाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पढ़ने और समझने की क्षमता कमजोर होने पर आगे की कक्षाओं में विद्यार्थियों को दूसरे विषयों को समझने में भी कठिनाई हो सकती है। ऐसे में समय रहते कमजोरियों की पहचान करना शिक्षा व्यवस्था के लिए उपयोगी हो सकता है।

    18 से 21 अगस्त के बीच होने वाले इस सावधिक आकलन में 504 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके परिणामों से शिक्षकों और शिक्षा विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

    आकलन पूरा होने के बाद विद्यार्थियों के प्रदर्शन का विश्लेषण कर आगे की शैक्षणिक रणनीति तैयार किए जाने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य बच्चों को केवल परीक्षा के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी भाषाई और शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत करना है। यही वजह है कि इस सावधिक आकलन को प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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