Last updated: September 5th, 2026 at 02:38 pm

बिहार में बाढ़ की स्थिति शनिवार को और गंभीर हो गई। राज्य के 11 जिलों में करीब 10.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति पटना में सामने आई, जहां गंगा का जलस्तर गांधी घाट पर अपने अब तक के उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर पहुंच गया। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ का असर 11 जिलों के 50 प्रखंडों और 201 ग्राम पंचायतों तक पहुंच चुका है। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया शामिल हैं। कई इलाकों में पानी फैलने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है और प्रशासन को लगातार स्थिति पर नजर रखनी पड़ रही है।
पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता बन गया है। गांधी घाट पर शनिवार सुबह नदी का पानी पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर गया। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जलस्तर 50.53 मीटर तक पहुंच गया, जबकि यहां दर्ज उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर था। यह पिछला रिकॉर्ड अगस्त 2016 में दर्ज किया गया था। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि जलस्तर में आगे भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके कारण नदी किनारे और निचले इलाकों में खतरा और बढ़ सकता है।
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत और बचाव व्यवस्था को मजबूत किया है। कई इलाकों में NDRF और SDRF की टीमें तैनात हैं। लगभग 700 सरकारी नावों का इस्तेमाल लोगों की आवाजाही, राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर और सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की तथा अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक सहायता तेजी से पहुंचाने के निर्देश दिए। सरकार का जोर तटबंधों की लगातार निगरानी और संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक तैयारियों को मजबूत रखने पर है।
बिहार में केवल गंगा ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर भी चिंता का कारण बना हुआ है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा जैसी नदियां भी कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। नेपाल और झारखंड के कुछ हिस्सों में हुई भारी बारिश का असर भी बिहार की नदियों के जलस्तर पर पड़ा है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखना जरूरी हो गया है।
बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और ग्रामीण इलाकों में लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। जिन इलाकों में पानी लगातार बढ़ रहा है, वहां प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दे रहा है।
पटना और आसपास के निचले इलाकों में स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है। अधिकारियों को तटबंधों और सुरक्षा संरचनाओं की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए बचाव दलों को तैयार रखा गया है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल जान-माल की सुरक्षा और प्रभावित परिवारों तक भोजन, पेयजल तथा अन्य जरूरी सहायता पहुंचाना है।
बिहार में बाढ़ की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। 11 जिलों में 10 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने और पटना में गंगा के पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार करने के बाद प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। आने वाले घंटों में नदी के जलस्तर में होने वाला बदलाव बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। सरकार और बचाव एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव अभियान को और विस्तारित किया जा सकता है।
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