Last updated: September 6th, 2026 at 03:16 pm

बिहार में गंगा समेत कई नदियों के उफान से बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राज्य के 12 जिलों में बाढ़ का असर बताया जा रहा है। कई इलाकों में तटबंधों पर दबाव बढ़ा है और नए क्षेत्रों में पानी फैल रहा है। राजधानी पटना में गंगा का जलस्तर वर्ष 2016 के पुराने रिकॉर्ड को पार कर गया है।
गांधीघाट पर गंगा ने तोड़ा एक दशक पुराना रिकॉर्ड
पटना के गांधीघाट पर शनिवार को गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया। यह 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के उच्चतम स्तर से अधिक है। रविवार को जलस्तर 50.62 मीटर तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
गंगा का पानी खतरे के निशान से करीब 1.83 मीटर ऊपर पहुंचने के बाद नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
आरा और हाजीपुर के शहरी इलाकों में पहुंचा पानी
बाढ़ का पानी अब ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरों में भी प्रवेश कर गया है। भोजपुर के आरा शहर के छह वार्ड और वैशाली के हाजीपुर के आठ वार्ड प्रभावित बताए जा रहे हैं।
हाजीपुर-महनार रोड SH-122B पर नयागंज और हसनपुर पलवैया के पास पानी पहुंचने से यातायात प्रभावित हुआ है। महात्मा गांधी सेतु से कोनहाराघाट जाने वाली मुख्य सड़क पर भी बाढ़ का असर देखने को मिला है।
भोजपुर के बड़हरा और शाहपुर समेत कई प्रखंडों में हालात बिगड़ रहे हैं। सरैया-आरा मार्ग पर चौमुखा, पिपरा और यादवपुर के पास भी सड़क पर पानी चढ़ने की सूचना है।
सारण में दो जगह टूटे नदी के बांध
सारण में बाढ़ की स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब दो स्थानों पर नदी के बांध टूट गए। दिघवारा प्रखंड की त्रिलोकचक पंचायत के केशरपुर गांव के पास माही नदी का बांध करीब 25 से 30 फीट तक टूट गया, जिसके बाद आसपास के गांवों में पानी फैल गया।
वहीं, दरियापुर के मठिया के पास सुखमयी नदी का बांध टूटने से भी ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फैल गया है।
गंगा के साथ कई नदियां उफान पर
गंगा के अलावा सोन, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, घाघरा और बागमती समेत कई नदियों का जलस्तर विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बताया जा रहा है। बढ़ते जलस्तर के कारण संवेदनशील तटबंधों पर दबाव बना हुआ है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने के साथ राहत और बचाव अभियान तेज किया गया है।
NDRF-SDRF की 34 टीमें संभाल रहीं मोर्चा
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान के लिए NDRF की 7 और SDRF की 27 टीमें तैनात हैं। यानी कुल 34 टीमें राहत-बचाव कार्य में लगी हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 50 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 19 बोट एंबुलेंस और 36 पशु चिकित्सा शिविर भी चल रहे हैं। लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के लिए 858 नावों का परिचालन कराया जा रहा है।
12 जिलों के अधिकारियों को मौके पर रहने का निर्देश
बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए पटना, बक्सर, भोजपुर, सारण, वैशाली, बेगूसराय, मुंगेर, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार के प्रभारी मंत्री एवं प्रभारी सचिवों को प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों की निगरानी करने को कहा गया है।
पटना में शहरी सुरक्षा तटबंध और आसपास के क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने का निर्देश भी दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वे कर लिया जायजा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने भागलपुर के नवगछिया में राघोपुर तटबंध का जायजा लेने के साथ बेगूसराय, मुंगेर और खगड़िया में राहत एवं बचाव तैयारियों की समीक्षा की।
हवाई सर्वे के दौरान स्थिति देखने के बाद मुख्यमंत्री ने जरूरत के मुताबिक सामुदायिक रसोई बढ़ाने और उन्हें चौबीसों घंटे संचालित करने के निर्देश दिए। प्रभावित इलाकों में मोबाइल मेडिकल टीम, दियारा क्षेत्रों में बोट एंबुलेंस और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त मेडिकल कैंप उपलब्ध कराने को भी कहा गया।
किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाने का निर्देश
बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पात्र किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई पात्र किसान सरकारी सहायता से वंचित न रहे।
फिलहाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची गंगा, शहरों में फैलता बाढ़ का पानी और कई नदियों का लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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