Last updated: September 9th, 2026 at 03:56 pm

दिल्ली के सत्य निकेतन में PG इमारत गिरने की घटना के बाद छात्रों के सुरक्षित और किफायती आवास का मुद्दा दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कॉलेजों में छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को तय की है।
यह जनहित याचिका सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG या हॉस्टल इमारत के गिरने के बाद दायर की गई है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए उपलब्ध निजी PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था तथा विश्वविद्यालयों में संस्थागत आवास की कमी को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, अदालत में दायर याचिका और हादसे के बीच संबंध का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने सभी निजी PG को असुरक्षित घोषित किया है। मामले में अलग-अलग आवासों की सुरक्षा की जांच और नियमन के मुद्दे अलग प्रक्रिया के तहत देखे जा रहे हैं।
याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में छात्रों की जरूरत के अनुसार हॉस्टल की उपलब्धता का व्यापक आकलन किया जाए। इसके साथ ही पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती संस्थागत हॉस्टल विकसित करने के लिए समयबद्ध हॉस्टल विकास नीति या मास्टर प्लान तैयार करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने उन कॉलेजों में हॉस्टल बनाने या मौजूदा सुविधाओं का विस्तार करने का सुझाव दिया है जहां इसके लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है।
जिन कॉलेजों में जमीन की कमी है, उनके लिए याचिका में साझा या क्लस्टर हॉस्टल बनाने की संभावना पर भी विचार करने की मांग की गई है। ऐसे हॉस्टल सरकारी या विश्वविद्यालय की उपयुक्त जमीन पर बनाए जा सकते हैं और आसपास के कई कॉलेजों के छात्रों को सुविधा दी जा सकती है। इसका उद्देश्य छात्रों को निजी PG पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत कम करना और उन्हें अधिक व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराना है।
बुधवार की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय से जवाब मांगा। अदालत ने याचिका में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC को पक्षकार बनाए जाने पर भी सवाल उठाया और उसे पक्षकारों की सूची से हटाने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता के वकील को संशोधित पक्षकार सूची दाखिल करने के लिए समय दिया गया है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि अदालत ने अभी सभी DU कॉलेजों को तुरंत हॉस्टल उपलब्ध कराने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। 8 सितंबर को इसी मांग से जुड़ी याचिका पर अदालत ने तत्काल अंतरिम आदेश देने से इनकार किया था और मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने को कहा था। बुधवार को नई याचिका पर नोटिस जारी होने के बाद अब संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
सत्य निकेतन हादसे के बाद PG और निजी हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर अलग कदम उठाए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार निजी PG और हॉस्टल के नियमन के लिए प्रस्तावित कानून पर काम कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में लाइसेंस, पुलिस क्लीयरेंस और संरचनात्मक तथा अग्नि सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र जैसी शर्तें शामिल किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, यह प्रस्तावित व्यवस्था है और इसे अंतिम कानून मानना अभी सही नहीं होगा।
दिल्ली हाईकोर्ट में हॉस्टल सुविधाओं से जुड़ी याचिका की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। उसी दिन सत्य निकेतन हादसे से संबंधित एक अन्य जनहित याचिका पर भी सुनवाई होनी है। अब केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि छात्रों के लिए हॉस्टल क्षमता बढ़ाने, सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने और मौजूदा व्यवस्था में सुधार को लेकर क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
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