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बक्सर में छात्राओं से दुर्व्यवहार के आरोप में दो शिक्षक बर्खास्त, विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित

    बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव प्रखंड में छात्राओं से कथित दुर्व्यवहार और आपत्तिजनक वीडियो से जुड़े मामले
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    बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव प्रखंड में छात्राओं से कथित दुर्व्यवहार और आपत्तिजनक वीडियो से जुड़े मामले में शिक्षा विभाग ने दो सरकारी शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में दोनों शिक्षकों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। दोनों को भविष्य में किसी सरकारी पद पर नियुक्ति के लिए भी अयोग्य घोषित किया गया है।

     

    बर्खास्त किए गए शिक्षकों की पहचान वीरेंद्र प्रसाद और अरविंद कुमार के रूप में हुई है। दोनों डुमरांव प्रखंड के नथुनी अहिर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय से जुड़े थे। शिक्षा विभाग के अनुसार, दोनों के खिलाफ छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार, आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने और ऑडियो संदेशों के जरिए धमकी देने से संबंधित आरोप लगाए गए थे।

     

    मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने 2 सितंबर को दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया था। इसके अगले दिन उनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर विभागीय जांच शुरू की गई। जांच के दौरान शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा की गई। जांच रिपोर्ट में दोनों शिक्षकों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि होने के बाद अनुशासनिक प्राधिकारी ने बर्खास्तगी की कार्रवाई की।

     

    मामले में पुलिस ने भी कार्रवाई की है। पीड़ित छात्रा की मां की शिकायत के आधार पर शिक्षकों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में स्कूल के प्रधानाध्यापक का नाम भी प्राथमिकी में शामिल किया गया था। पुलिस ने आरोपों की जांच करते हुए संबंधित शिक्षकों को गिरफ्तार किया था।

     

    पुलिस जांच में यह भी देखा जा रहा है कि मामले में सामने आए वीडियो से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और क्या इस प्रकरण में स्कूल के पूर्व छात्र भी प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच का दायरा केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रखा गया है और सामने आने वाली अन्य शिकायतों की भी जांच की जा रही है।

     

    शिक्षा विभाग की कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14(11) के तहत की गई है। इस प्रावधान के तहत सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद संबंधित कर्मचारी भविष्य में सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं रहता।

     

    मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाने की बात कही है। शिक्षा मंत्री ने बक्सर के अधिकारियों को मामले में कानूनी कार्रवाई तेज करने और गिरफ्तारी के बाद फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराने के निर्देश दिए थे।

     

    मामले की जांच अब पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों के स्तर पर भी आगे बढ़ रही है। विभागीय कार्रवाई के बाद दोनों शिक्षकों की सरकारी सेवा समाप्त हो चुकी है, जबकि आपराधिक मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच और अदालत की कार्रवाई के अनुसार चलेगी।

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