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कुशीनगर में नारायणी नदी का कहर, तटबंध टूटने से कई गांवों में घुसा पानी; राहत-बचाव अभियान तेज

    उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में नारायणी नदी के बढ़े जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी
Flood

 

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    उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में नारायणी नदी के बढ़े जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। सोमवार देर रात तमकुहीराज क्षेत्र में जवहीं दयाल के पास नारायणी नदी के एपी तटबंध का एक हिस्सा टूट गया, जिसके बाद आसपास के गांवों में तेजी से पानी फैल गया। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। प्रशासन और आपदा राहत दल प्रभावित इलाकों में बचाव एवं राहत कार्य में जुटे हुए हैं।

     

    तटबंध टूटने के बाद पानी आसपास के निचले इलाकों में तेजी से पहुंचा। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के सामने घर-गृहस्थी का सामान सुरक्षित निकालने के साथ बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

     

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कुशीनगर के प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने तटबंध और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लिया तथा प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने राहत शिविर और अन्य स्थानों पर रह रहे लोगों के बीच राहत सामग्री भी वितरित की।

     

    मुख्यमंत्री के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में नारायणी नदी में लगभग तीन से चार लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह रहता है, लेकिन हाल में यह बढ़कर करीब साढ़े पांच लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। नेपाल में हुई भारी बारिश और वहां से नीचे की ओर आए पानी को भी इस बढ़ोतरी का एक कारण बताया गया है। पानी के अचानक बढ़े दबाव के कारण तटबंध प्रभावित हुआ और आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया।

     

    राहत और बचाव अभियान में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तथा पीएसी की फ्लड यूनिट को लगाया गया है। प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार की ओर से करीब 5,000 सूखे राहत पैकेट की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई है।

     

    राहत पैकेटों में चावल, आटा, दाल, आलू, चना, तेल, मसाले, नमक और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। बाढ़ के कारण जिन परिवारों के घरों को नुकसान पहुंचा है, उनके लिए भी सहायता की घोषणा की गई है। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नए आवास उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए आर्थिक सहायता देने का निर्देश दिया गया है।

     

    बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ने की आशंका है। प्रभावित क्षेत्र के करीब 15 से 16 गांवों में धान, गन्ना और सब्जियों जैसी फसलों को नुकसान होने की संभावना जताई गई है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को फसल नुकसान का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जल्द मुआवजा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे पूरा होने के बाद 10 दिनों के भीतर सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

     

    बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अगले कुछ दिनों तक स्वास्थ्य विभाग की टीमों को क्षेत्र में सक्रिय रहने के लिए कहा गया है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सांप काटने की स्थिति में इस्तेमाल होने वाली एंटी-स्नेक वेनम और अन्य जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

     

    तटबंध टूटने के बाद सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। प्रशासन को प्रभावित सड़कों की मरम्मत कराने तथा बाढ़ का पानी कम होने के बाद तटबंध को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन कराने की योजना भी बताई गई है, ताकि नदी के बहाव को व्यवस्थित किया जा सके और भविष्य में तटबंध तथा आसपास के गांवों पर दबाव कम किया जा सके।

     

    कुशीनगर की स्थिति का संबंध नेपाल और बिहार में हुई भारी बारिश से भी जुड़ा हुआ है। लगातार बारिश के कारण नारायणी-गंडक नदी प्रणाली में पानी का दबाव बढ़ा है और उत्तर प्रदेश के साथ बिहार के कई इलाकों में भी बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में नदी के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

     

    कुशीनगर में प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और बाढ़ से होने वाले अतिरिक्त नुकसान को रोकने पर है। पानी का स्तर कम होने के बाद क्षतिग्रस्त तटबंध, सड़क और कृषि भूमि के नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा। नारायणी नदी का जलस्तर और आसपास के इलाकों की स्थिति आने वाले दिनों में भी प्रशासन की निगरानी में रहेगी।

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