Last updated: October 23rd, 2026 at 04:51 pm

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव के बीच मतदाता सूची में दर्ज कथित अजीबोगरीब नामों और विवरणों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कहीं मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज होने का दावा किया जा रहा है, तो कहीं पिता के नाम वाले कॉलम में ‘बी.कॉम’ लिखा मिला। इन कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने सफाई देते हुए इसे सॉफ्टवेयर में हिंदी रूपांतरण की संभावित त्रुटि और मानवीय लापरवाही से जुड़ा मामला बताया है।
ये विसंगतियां इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में सामने आने की बात कही गई है। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर मतदान के बीच सोशल मीडिया पर कथित गलत प्रविष्टियों की चर्चा तेज हुई, जिसके बाद निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया।
‘रामहित यादव’ से ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे बना?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से दी गई जानकारी के मुताबिक, विधान परिषद चुनाव के लिए पहली बार ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। आयोग के अनुसार, कुल 14,81,310 प्रविष्टियों में से 158 ऐसी प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें मतदाताओं या उनके परिजनों के नाम असामान्य दिखाई दे रहे थे।
सीईओ कार्यालय ने बताया कि सॉफ्टवेयर अंग्रेजी में दर्ज नामों को हिंदी में लिप्यंतरित करता था। कुछ मामलों में तकनीकी गड़बड़ी के कारण नामों का लिप्यंतरण करने के बजाय उनका अर्थ बदल गया।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति का नाम ‘रामहित यादव’ है और अंग्रेजी में उसे ‘Ramhit Yadav’ लिखने के बजाय गलती से ‘Ram hit Yadav’ दर्ज कर दिया जाए, तो सॉफ्टवेयर उसका हिंदी रूपांतरण ‘राम ने यादव को मारा’ कर सकता है। कार्यालय के मुताबिक, ऐसी प्रविष्टियों को संपादित करके सुधारने की व्यवस्था थी, लेकिन कुछ मामलों में सावधानी नहीं बरते जाने के कारण गलतियां बनी रह गईं। पिता के नाम वाले कॉलम में ‘B.Com’ दर्ज होने को मानवीय भूल या लापरवाही से जुड़ा मामला बताया गया।
साकेत गोखले ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने सॉफ्टवेयर की गलती वाले स्पष्टीकरण को बहाना बताते हुए चुनावी धांधली का आरोप लगाया।
गोखले ने दावा किया कि विपक्ष पहले से ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान अपारदर्शी सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाता रहा है। उन्होंने आयोग के अधिकारियों के बीच कथित शिकायतों का भी जिक्र किया।
TMC सांसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की। साथ ही, मतदाता सूची तैयार करने में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। हालांकि, ये गोखले के आरोप हैं। मतदाता सूची में सामने आई त्रुटियां अपने आप में चुनावी धांधली साबित नहीं करतीं।
श्रीनिवास बी.वी. का तंज- ‘सॉफ्टवेयर है कि हिट की दुकान?’
कांग्रेस नेता श्रीनिवास बी.वी. ने भी कथित गलत अनुवाद पर सवाल उठाते हुए व्यंग्य किया। उन्होंने ‘रामहित यादव’ के उदाहरण के जरिए पूछा कि अंग्रेजी में नाम टाइप करते समय स्पेस की गलती होने पर उसका अर्थ बदलकर ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे हो गया।
इस गड़बड़ी पर तंज कसते हुए उन्होंने सवाल किया, ‘सॉफ्टवेयर है कि हिट की दुकान?’
संजय सिंह ने पूछा- पिता का नाम ‘बी.कॉम’ कैसे?
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी मतदाता सूची की कथित विसंगतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या किसी व्यक्ति के पिता का नाम ‘बी.कॉम’ हो सकता है और किसी मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज किया जा सकता है? उन्होंने सवाल किया कि ऐसी प्रविष्टियां मतदाता सूची में कैसे शामिल हो गईं।
‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ वाली प्रविष्टि पर भी सवाल
आम आदमी पार्टी से जुड़े मनोज काका ने भी मतदाता सूची में एक कथित प्रविष्टि का मुद्दा उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि एक मतदाता का नाम ‘अफजल अहमद’ है, जबकि पिता के नाम वाले कॉलम में ‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ दर्ज है।
मनोज काका ने निर्वाचन आयोग से पूछा कि क्या इस तरह मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया जाता है। उन्होंने गलत प्रविष्टियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई।
चुनाव आयोग ने अधिकारियों से मांगा जवाब
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, मतदाता सूची में नामों और उनके परिजनों के विवरण से जुड़ी 158 प्रविष्टियां असामान्य पाई गईं। कार्यालय ने इन गड़बड़ियों के लिए अंग्रेजी से हिंदी में नामों के रूपांतरण के दौरान हुई संभावित तकनीकी त्रुटियों और मानवीय लापरवाही को जिम्मेदार बताया है।
कार्यालय ने स्पष्ट किया कि संबंधित मतदाता सूची के निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) मंडलायुक्त हैं, जबकि जिले के जिलाधिकारी सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (AERO) की भूमिका में हैं। मतदाता सूची को त्रुटिरहित रखना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इस मामले में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
साथ ही, जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन गलत प्रविष्टियों के कारण मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। अब इस मामले में अधिकारियों के जवाब और त्रुटियों को सुधारने की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
![]()
Comments are off for this post.