Last updated: October 23rd, 2026 at 05:31 pm

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के वरिष्ठ कमांडरों से भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अगले 20 से 30 वर्षों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक योजना तैयार करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि सेना को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार रहने के साथ-साथ मौजूदा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी सक्षम होना चाहिए।
नई दिल्ली में आयोजित आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने भू-राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल के अनुसार सैन्य रणनीतियों में लचीलापन बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र, आधुनिक हथियारों की भूमिका पर जोर
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें नई सोच, बेहतर समन्वय और आधुनिक हथियारों ने अहम भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, इस अभियान ने यह संदेश दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने को तैयार है।
रक्षा मंत्री ने सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियों, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसी तकनीकों को तेजी से अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने सुरक्षित संचार नेटवर्क को मजबूत करने की जरूरत भी बताई, ताकि आधुनिक युद्ध की परिस्थितियों में सेना अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सके।
आधुनिक तकनीक के साथ जमीनी युद्ध भी अहम
रक्षा मंत्री ने कहा कि वायु, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है, लेकिन जमीनी युद्ध की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। इसके लिए तीनों सेनाओं और अन्य संबंधित सैन्य क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल तथा एकीकृत रणनीति की जरूरत है।
उन्होंने सैन्य सुधारों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने, मानव संसाधन प्रबंधन में सुधार करने और सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। साथ ही, स्वदेशी रक्षा तकनीक और उपकरणों के विकास में लगातार निवेश करने की आवश्यकता बताई।
रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का दावा
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर सरकार के फोकस का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने रक्षा निर्यात के लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी भी दी, जिसे अब तक का उच्चतम स्तर बताया गया।
‘सुधारों का वर्ष-2025’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सैन्य सुधारों का वास्तविक असर जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। इनका उद्देश्य सेना की परिचालन तैयारियों और प्रभावशीलता में ठोस सुधार लाना होना चाहिए।
भविष्य के युद्धों के लिए ‘लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन’ जारी
सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री ने ‘लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन’ यानी जमीनी युद्ध सिद्धांत जारी किया। इसका उद्देश्य युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य के संघर्षों की जरूरतों के अनुरूप भारतीय सेना को तैयार करना है।
इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र से संबंधित वार्षिक जर्नल भी जारी किया गया। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में योगदान देने वाले भारतीय सेना के जवानों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस सेना के वरिष्ठ नेतृत्व को मौजूदा पहलों की समीक्षा करने, भविष्य की प्राथमिकताएं तय करने और तकनीकी रूप से उन्नत तथा बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने वाली सेना के निर्माण के लिए रणनीति तैयार करने का अवसर प्रदान करता है।
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