Last updated: October 23rd, 2026 at 05:43 pm

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव के बीच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश सीमा पर कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हो रहा है। उन्होंने बताया कि सीमा पर ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने के लिए ITBP विशेष कमांडो बल तैयार करने के साथ ड्रोन तकनीक और सुरक्षा ढांचे पर भी निवेश कर रहा है।
राजस्थान के अलवर में गुरुवार को आयोजित वार्षिक ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ में कपूर ने ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में सैनिकों का आमना-सामना हुआ है और ऐसी परिस्थितियों से निपटने में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त जवानों की भूमिका अहम है।
चीन सीमा पर तैनाती के लिए तैयार हो रही ‘शौर्य कमांडो’ बटालियन
ITBP प्रमुख ने बताया कि बल अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में ऑपरेशन करने की अपनी क्षमता को और मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में चीन सीमा पर परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए ‘शौर्य कमांडो’ की पूरी बटालियन तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करना ITBP की प्रमुख क्षमताओं में शामिल है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जवानों की तैयारी और विशेष प्रशिक्षण सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक पर बढ़ेगा जोर
आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों का उल्लेख करते हुए कपूर ने ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सीमा पर निगरानी और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उन्नत तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है।
ITBP ने अपने आधुनिकीकरण बजट का बड़ा हिस्सा ड्रोन तकनीक के लिए आवंटित किया है। इसके तहत सीमा पर तैनात बटालियनों में ड्रोन प्लाटून बनाए गए हैं और ड्रोन संचालन के लिए पायलटों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल निगरानी और परिस्थितियों की जानकारी जुटाने में मददगार हो सकता है, जबकि काउंटर-ड्रोन सिस्टम संभावित ड्रोन खतरों से निपटने के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
चीन सीमा पर बनेंगे भूमिगत सुरक्षा आश्रय
सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए ITBP अगले तीन वर्षों में भूमिगत आश्रय स्थल बनाने की योजना पर भी काम कर रहा है। कपूर के मुताबिक, इस परियोजना के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।
प्रस्तावित भूमिगत ढांचों में वेंटिलेशन, जल निकासी और अन्य जरूरी सुविधाएं शामिल होंगी। इनका उद्देश्य संभावित टकराव या कठिन परिस्थितियों के दौरान जवानों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है। यह पहल सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और प्रतिकूल परिस्थितियों में जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यापक तैयारियों का हिस्सा है।
तनाव के बीच भारत-चीन वार्ता भी जारी
अरुणाचल प्रदेश सीमा पर सैनिकों के आमना-सामना होने की जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर राजनयिक और सैन्य स्तर पर बातचीत जारी है। जुलाई से दोनों देशों के बीच कई उच्च-स्तरीय बैठकें होने की बात कही गई है।
सीमा के कुछ हिस्सों में तनाव बने रहने के बावजूद, दोनों पक्ष बातचीत के जरिए संबंधित मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे हालात में ITBP की ओर से विशेष कमांडो बल, ड्रोन तकनीक और भूमिगत सुरक्षा आश्रयों पर जोर देना सीमा पर परिचालन तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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