Last updated: October 27th, 2026 at 08:28 am

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज होने लगी है। नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के एक बयान को लेकर सियासी चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने माफिया, हथियारों के प्रदर्शन और गरीबों में डर पैदा करने का मुद्दा उठाया। इसे कुंडा विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है। इस पर जनसत्ता दल के एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी ने पलटवार किया है।
चंद्रशेखर आजाद ने माफिया को लेकर क्या कहा?
एक सभा में चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश को माफिया मुक्त बनाने के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोग खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन करते हैं और इससे गरीबों में डर का माहौल बनता है। उनके मुताबिक, कार्रवाई के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर दिखाई देता है।
हालांकि, उपलब्ध बयान में चंद्रशेखर आजाद ने राजा भैया का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया। ऐसे में उनके बयान को राजा भैया पर सीधा आरोप बताने से पहले पूरे संदर्भ को देखना जरूरी है।
2027 से आगे तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी लड़ाई गरीबों को अधिकार दिलाने के लिए है। उन्होंने 2027, 2029, 2032 और 2037 के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने गरीबों के हक और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहने की बात कही।
अक्षय प्रताप सिंह ने किया पलटवार
चंद्रशेखर आजाद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जनसत्ता दल के एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी ने उनके आरोपों को तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजा की परंपरा रही है और यह आस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में शस्त्र पूजा को गलत नजरिए से देखना उचित नहीं है।
अक्षय प्रताप सिंह ने इस मुद्दे पर चंद्रशेखर आजाद की टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा कि धार्मिक परंपराओं को राजनीतिक आरोपों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
बोले- राजा भैया की अपनी राजनीतिक पहचान
अक्षय प्रताप सिंह ने कहा कि राजा भैया की अपनी राजनीतिक पहचान है और उनकी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक स्वतंत्र रूप से काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर आजाद के बयान से राजा भैया को किसी राजनीतिक गठबंधन से जोड़कर पेश करने की कोशिश की गई है, जो उचित नहीं है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो रही है। चंद्रशेखर आजाद के बयान और अक्षय प्रताप सिंह के जवाब के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा बढ़ गई है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस बयानबाजी को लेकर दोनों पक्षों की ओर से कोई और प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
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