Last updated: October 28th, 2026 at 03:37 pm

दिल्ली में शाहदरा पुलिस स्टेशन पर पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुआ विवाद अब बड़े टकराव में बदल गया है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 15 से 20 वकीलों के खिलाफ कथित तौर पर अभद्रता करने, पुलिस अधिकारियों को धमकाने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। दूसरी ओर, दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम से राजधानी में पुलिस और वकीलों के बीच तनाव बढ़ गया है और अदालतों में नियमित न्यायिक कामकाज प्रभावित होने की स्थिति पैदा हो गई है।
मामले की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा इलाके में एक कथित मारपीट की घटना से हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, अधिवक्ता ललित बंसल पर हमला हुआ था, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोट आई। इस घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की और उन्हें थाने से छोड़ दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच विवाद बढ़ता गया।
24 अक्टूबर को कुछ वकील इस मामले में कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस की शिकायत के अनुसार, इससे पहले कड़कड़डूमा अदालत परिसर में एक हेड कांस्टेबल को कुछ वकीलों ने रोककर आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी को लेकर सवाल किए थे। बाद में लगभग 15 से 20 वकील थाने पहुंचे और थाना प्रभारी के कमरे में अधिकारियों से बातचीत करने लगे। पुलिस का आरोप है कि बातचीत के दौरान वकीलों ने अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और सरकारी काम में बाधा डाली।
सहायक पुलिस आयुक्त मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत के आधार पर 26 अक्टूबर को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने, ड्यूटी से रोकने के लिए बल प्रयोग या हमला करने, सरकारी कर्मचारी को नुकसान पहुंचाने की धमकी देने और साझा मंशा से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक वकील ने थाना प्रभारी का हाथ पकड़कर खींचने की कोशिश की और कुछ अन्य लोगों ने पुलिसकर्मियों को धमकाया। अधिकारियों के अनुसार, थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में घटना रिकॉर्ड हुई है और मामले की जांच की जा रही है।
हालांकि, वकीलों ने पुलिस के आरोपों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वे अपने साथी अधिवक्ता पर हुए कथित हमले के मामले में कार्रवाई की मांग करने थाने गए थे। वकीलों ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और एक अधिकारी ने कथित तौर पर अपना हथियार दिखाकर उन्हें धमकाया। पुलिस ने इस आरोप की जांच किए जाने की बात कही है। फिलहाल, दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
घटना के विरोध में दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल का फैसला लिया। वकीलों की मांग है कि संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त, थाना प्रभारी और अन्य जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित किया जाए तथा उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। बार एसोसिएशनों ने वकीलों से एकजुट रहने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अपील की है।
28 अक्टूबर को भी जिला अदालतों में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद 29 अक्टूबर को पटियाला हाउस अदालत परिसर से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की योजना बनाई गई। वकीलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक कामबंद आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामले में सामने आए सभी आरोपों और घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
इस विवाद का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। अदालतों में हड़ताल होने से सुनवाई, जमानत याचिकाओं और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी हो सकती है। हालांकि, आवश्यक मामलों को लेकर संबंधित अदालतों की व्यवस्थाएं अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में जिन लोगों की सुनवाई निर्धारित है, उन्हें अपने वकील या संबंधित अदालत से ताजा जानकारी लेनी चाहिए।
शाहदरा थाने का विवाद पुलिस और वकीलों के बीच विश्वास तथा जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। एक ओर पुलिस ने वकीलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, वहीं दूसरी ओर वकील पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मामले में निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा और दोनों पक्षों के आरोपों की कानूनी प्रक्रिया के तहत पड़ताल से ही घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
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