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बारिश ने धोया दिल्ली का प्रदूषण, AQI गिरकर 60 पर पहुंचा; चार साल में अक्टूबर का सबसे साफ दिन दर्ज

  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार हुई बारिश ने लोगों को प्रदूषण से बड़ी राहत दी है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर
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    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार हुई बारिश ने लोगों को प्रदूषण से बड़ी राहत दी है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गिरकर 60 पर पहुंच गया। इसके साथ ही राजधानी में पिछले चार वर्षों के दौरान अक्टूबर महीने का सबसे साफ दिन दर्ज किया गया। कुछ दिनों पहले तक प्रदूषण के कारण खराब होती हवा से परेशान दिल्लीवासियों को बारिश के बाद सांस लेने के लिहाज से बेहतर वातावरण मिला। हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने इसे स्थायी सुधार मानने से सावधान किया है, क्योंकि हवा की गुणवत्ता पर मौसम का प्रभाव काफी अधिक रहा है।

     

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के शाम चार बजे जारी बुलेटिन के अनुसार, दिल्ली का AQI 60 दर्ज किया गया, जो संतोषजनक श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को राजधानी का AQI 222 था, जो खराब श्रेणी में शामिल था। इस तरह केवल एक दिन में वायु गुणवत्ता सूचकांक में 162 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। अक्टूबर महीने में वर्ष 2015 के बाद यह सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में से एक बताई गई है।

     

    इस सुधार की प्रमुख वजह दिल्ली और आसपास के इलाकों में हुई तेज बारिश रही। सफदरजंग मौसम केंद्र में शुक्रवार सुबह 8:30 बजे समाप्त हुए पिछले 24 घंटों के दौरान 61.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। अक्टूबर महीने के लिए यह पिछले चार वर्षों की सबसे अधिक एकदिवसीय बारिश थी। बारिश के कारण वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषण के कई कण नीचे बैठ गए तथा हवा में मौजूद प्रदूषकों के फैलाव में भी मदद मिली।

     

    दिल्ली के मौसम में इस दौरान असामान्य बदलाव भी देखने को मिला। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सफदरजंग में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 20.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह सामान्य से 10.3 डिग्री कम था और वर्ष 1951 के बाद अक्टूबर महीने में दर्ज किया गया सबसे कम अधिकतम तापमान बताया गया। इससे पहले अक्टूबर में सबसे कम अधिकतम तापमान का रिकॉर्ड 25 अक्टूबर 1975 को 21.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

     

    राजधानी के दूसरे मौसम केंद्रों पर भी तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा। पालम में अधिकतम तापमान 20.5 डिग्री, लोधी रोड में 20.6 डिग्री, रिज में 20.8 डिग्री और आया नगर में 20.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। लगातार बारिश और बादलों के कारण लोगों को अक्टूबर के अंतिम दिनों में ही सर्दियों जैसा मौसम महसूस हुआ। सुबह और शाम के समय कुछ इलाकों में हल्का कोहरा भी देखने को मिला।

     

    सिर्फ एक दिन की हवा ही नहीं, बल्कि पूरे अक्टूबर महीने के औसत AQI में भी सुधार दर्ज किया गया। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण के अनुसार, अक्टूबर 2026 में दिल्ली का औसत AQI लगभग 167 रहा। यह वर्ष 2015 के बाद अक्टूबर महीने का सबसे कम औसत बताया गया है। तुलना करें तो अक्टूबर 2025 में औसत AQI 223, वर्ष 2024 में 234 और वर्ष 2023 में 219 दर्ज किया गया था।

     

    हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस सुधार का बड़ा कारण असामान्य बारिश और मौसम की परिस्थितियां हैं। CREA से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश ने प्रदूषण के कणों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पर्यावरण विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि केवल सरकारी प्रदूषण नियंत्रण उपायों को इस गिरावट का पूरा श्रेय देना सही नहीं होगा। मौसम, हवा की दिशा, नमी और क्षेत्रीय प्रदूषण का प्रभाव भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

     

    शनिवार, 31 अक्टूबर की सुबह दिल्ली का AQI 95 दर्ज किया गया, जो शुक्रवार के 60 से अधिक था, हालांकि यह अभी भी संतोषजनक श्रेणी में रहा। इससे संकेत मिला कि बारिश के बाद मिली राहत में धीरे-धीरे बदलाव हो सकता है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता फिर बिगड़ सकती है। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम ने नवंबर की शुरुआत में प्रदूषण के खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका जताई है।

     

    दिल्ली में हर साल अक्टूबर के अंत और नवंबर के दौरान प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगता है। तापमान में गिरावट, हवा की धीमी गति, पराली जलाने से आने वाला धुआं, वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां और औद्योगिक प्रदूषण इसके प्रमुख कारण हैं। सर्दियों में वातावरण की ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं, जिनमें प्रदूषक जमीन के नजदीक जमा रहने लगते हैं।

     

    इस बार अक्टूबर के अंतिम दिनों में हुई बारिश ने राजधानी को अस्थायी राहत जरूर दी है, लेकिन आने वाले समय में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास जरूरी होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, वाहनों से निकलने वाले धुएं, कचरा जलाने, निर्माण स्थलों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण के बिना साफ हवा बनाए रखना मुश्किल होगा। फिलहाल दिल्लीवासियों के लिए बारिश के बाद मिली यह राहत महत्वपूर्ण है, लेकिन सर्दियों के मौसम में हवा की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखना जरूरी रहेगा।

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