Last updated: November 3rd, 2026 at 12:47 pm

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गई है। ITO समेत राजधानी के प्रमुख क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषण की बढ़ती स्थिति ने प्रशासन और पर्यावरण से जुड़े विभागों की चिंता बढ़ा दी है।
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं वायु प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान देती हैं। इसके अलावा मौसम में बदलाव और हवा की कम गति के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा होने लगते हैं। तापमान में गिरावट और हवा के ठहराव की स्थिति प्रदूषण को और गंभीर बना सकती है।
दिल्ली के ITO इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक 349 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। यह स्तर बेहद खराब श्रेणी के करीब माना जाता है। राजधानी के कई अन्य इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दर्ज किया गया। कुछ क्षेत्रों में AQI 350 के आसपास या उससे ऊपर रहने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ गया है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI के माध्यम से वातावरण में मौजूद प्रदूषकों के प्रभाव का आकलन किया जाता है। 301 से 400 के बीच AQI को बेहद खराब श्रेणी में रखा जाता है। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से स्वस्थ व्यक्तियों को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है, जबकि पहले से बीमार लोगों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। 401 से 500 के बीच AQI गंभीर श्रेणी में आता है, जिसमें स्वास्थ्य पर अधिक व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के दूसरे चरण को लागू किया गया है। GRAP-2 के तहत प्रदूषण कम करने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं। इनमें सड़कों की नियमित सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निगरानी बढ़ाना शामिल है। दिल्ली में मेट्रो सेवाओं के अतिरिक्त फेरों और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं।
प्रशासन द्वारा वाहनों की जांच और प्रदूषण प्रमाणपत्र की निगरानी भी तेज की गई है। पुराने या निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। निर्माण गतिविधियों में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों के खिलाफ जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए विभिन्न विभागों को जिम्मेदारी दी गई है।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है। सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर अधिक हो सकता है, तब अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना उपयोगी रहेगा। बच्चों और बुजुर्गों को खुले वातावरण में अधिक समय बिताने से बचाना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या लगातार खांसी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
राजधानी में प्रदूषण की स्थिति आने वाले दिनों में मौसम और हवा की गति पर निर्भर करेगी। यदि हवा की गति कम रहती है और प्रदूषकों का फैलाव नहीं हो पाता है, तो वायु गुणवत्ता में सुधार होने में समय लग सकता है। प्रशासन के सामने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने और लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है। दिल्लीवासियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर कम होगा और राजधानी की हवा में सुधार देखने को मिलेगा।
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