Last updated: November 4th, 2026 at 02:27 pm

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पूर्वी इलाके मयूर विहार स्थित एक निजी स्कूल में बुधवार सुबह बेहद दुखद घटना सामने आई। यहां तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली नौ वर्षीय छात्रा की क्लासरूम में अचानक बेहोश होकर गिरने के बाद मौत हो गई। बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और परिवार में मातम छा गया।
यह घटना मयूर विहार फेज-2 स्थित लवली पब्लिक स्कूल की है। बुधवार, 4 नवंबर की सुबह छात्रा अपनी नियमित कक्षाओं में शामिल थी। इसी दौरान वह अचानक अपनी कक्षा में गिर पड़ी। घटना स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हो गई है। पुलिस ने फुटेज को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजकर 52 मिनट पर पीसीआर कॉल के माध्यम से घटना की सूचना मिली थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। स्कूल प्रशासन बच्ची को तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचा। उसे पहले निर्माण विहार स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। इसके बाद बच्ची को मलिक रेडिक्स हेल्थकेयर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के सामने आने के बाद क्लासरूम का सीसीटीवी फुटेज भी जांच के दायरे में आया है। फुटेज में बच्ची कक्षा के अंदर अपनी शिक्षिका के सामने खड़ी दिखाई देती है। कुछ ही क्षणों बाद वह अचानक नीचे गिर जाती है। बच्ची को गिरते देखकर शिक्षिका तुरंत उसकी मदद के लिए पहुंचती हैं और उसे उठाकर कुर्सी पर बैठाने की कोशिश करती हैं। इस दौरान कक्षा के अन्य बच्चे भी आसपास इकट्ठा हो जाते हैं। कुछ छात्र मदद के लिए स्कूल के अन्य कर्मचारियों को बुलाने बाहर जाते दिखाई देते हैं।
स्कूल की प्रधानाचार्य डॉ. भावना ने बताया कि बच्ची अचानक कक्षा में गिर गई थी। स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की और उसके परिवार को भी सूचना दी। प्रधानाचार्य के अनुसार, अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची की मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया था।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्ची की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारण की पुष्टि हो सकेगी।
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अचानक बेहोशी, सांस लेने में परेशानी या हृदय संबंधी आपात स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में स्कूलों में प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और CPR जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण होना जरूरी माना जाता है।
बच्ची के परिवार की ओर से भी स्कूल में उपलब्ध आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं और घटना के दौरान दी गई सहायता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। परिवार ने आरोप लगाया है कि बच्ची को समय पर पर्याप्त प्राथमिक चिकित्सा और CPR नहीं दिया गया। स्कूल प्रशासन ने अपनी ओर से तत्काल अस्पताल पहुंचाने की बात कही है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच होना बाकी है।
दिल्ली पुलिस अब स्कूल प्रशासन, शिक्षकों और बच्ची के परिजनों के बयान दर्ज करने के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच कर रही है।
इस घटना से स्कूल के विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों में शोक का माहौल है। नौ साल की बच्ची की अचानक हुई मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की तैयारी कितनी मजबूत होनी चाहिए।
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