Last updated: November 4th, 2026 at 02:31 pm

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन लगातार नए कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में राजधानी में निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के उद्देश्य से पार्किंग शुल्क दोगुना करने की योजना बनाई गई है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के तहत यह कदम उठाया जा रहा है। हालांकि, दिल्ली नगर निगम (MCD) के लगभग 400 पार्किंग स्थलों पर नई दरें लागू करने का प्रस्ताव अभी मंजूरी की प्रक्रिया में है। दूसरी ओर, नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने अपने पार्किंग स्थलों पर 1 नवंबर से बढ़ी हुई दरें लागू कर दी हैं।
प्रशासन का मानना है कि पार्किंग शुल्क बढ़ने से लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करेंगे और मेट्रो, बस तथा अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की ओर आकर्षित होंगे। दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है। ऐसे में वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को और खराब कर देता है। पार्किंग शुल्क में वृद्धि को इसी समस्या से निपटने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
MCD की मौजूदा व्यवस्था के तहत चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग शुल्क 20 रुपये प्रति घंटा और दो पहिया वाहनों के लिए 10 रुपये प्रति घंटा है। प्रस्तावित बदलाव के बाद चार पहिया वाहनों का शुल्क 40 रुपये और दो पहिया वाहनों का शुल्क 20 रुपये प्रति घंटा हो सकता है। यह बढ़ोतरी निगम के लगभग 400 सतही पार्किंग स्थलों पर लागू करने की योजना है।
हालांकि, MCD के सामने इस प्रस्ताव को लागू करने में कुछ प्रशासनिक और कानूनी अड़चनें हैं। निगम के अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव को पहले कानूनी विभाग और संबंधित सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी की आवश्यकता है। इसके अलावा पार्किंग स्थलों का संचालन करने वाले निजी ठेकेदारों के साथ मौजूदा अनुबंधों में भी बदलाव करना पड़ सकता है।
दरअसल, पार्किंग शुल्क बढ़ने से मिलने वाली अतिरिक्त राशि किसके खाते में जाएगी, इसे लेकर भी सवाल हैं। मौजूदा अनुबंधों में अतिरिक्त शुल्क से मिलने वाली रकम स्वतः MCD को देने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में निगम को ठेकेदारों के साथ अनुबंध की शर्तों की समीक्षा करनी होगी।
इससे पहले भी MCD कई बार पार्किंग शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रख चुका है, लेकिन उसे सदन से मंजूरी नहीं मिल सकी। मार्च 2025 में भी पार्किंग शुल्क बढ़ाने का संशोधित प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था। अब प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए निगम एक बार फिर इस दिशा में प्रयास कर रहा है।
दूसरी तरफ, NDMC ने अपने अधिकार क्षेत्र में पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया है। इसके तहत सामान्य पार्किंग स्थलों पर चार पहिया वाहनों का शुल्क 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति घंटा और दो पहिया वाहनों का शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति घंटा किया गया है। कुछ बाजार क्षेत्रों में सड़क किनारे पार्किंग की दरें भी बढ़ाई गई हैं।
पार्किंग शुल्क बढ़ाने के साथ दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए अन्य उपाय भी लागू कर रही है। सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था, कार्यालयों के समय में बदलाव और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करने जैसे कदम शीतकालीन कार्ययोजना का हिस्सा हैं।
इसके अलावा निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण, सड़कों पर पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल और खुले में कचरा जलाने पर रोक लगाने जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर एक साथ नियंत्रण स्थापित करना है।
हालांकि, पार्किंग शुल्क बढ़ाने के फैसले को लेकर आम वाहन चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। रोजाना निजी वाहन से कार्यालय जाने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है। वहीं, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता और उसकी सुविधाओं में सुधार करना भी जरूरी होगा, ताकि लोग आसानी से निजी वाहनों का विकल्प चुन सकें।
दिल्ली में पार्किंग शुल्क बढ़ाने की प्रक्रिया दो अलग-अलग नागरिक निकायों के स्तर पर आगे बढ़ रही है। NDMC क्षेत्र में नई दरें लागू हो चुकी हैं, जबकि MCD के पार्किंग स्थलों पर अंतिम मंजूरी का इंतजार है। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर होने वाला फैसला राजधानी के लाखों वाहन चालकों और पार्किंग व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
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