Last updated: April 27th, 2026 at 08:18 am

नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कोलकाता स्थित थंथनिया कालीबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की। रोड शो से पहले मंदिर पहुंचकर उन्होंने मां काली का आशीर्वाद लिया, जिसे राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
यह मंदिर कोलकाता के प्रमुख और ऐतिहासिक काली मंदिरों में से एक है, जहां देवी की पूजा मां सिद्धेश्वरी के रूप में की जाती है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां मांस को प्रसाद के रूप में चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है।
बताया जाता है कि रामकृष्ण परमहंस भी इस मंदिर में आकर भक्ति किया करते थे। उनके समय से ही यहां विशेष परंपराएं चली आ रही हैं, जो बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं।
प्रधानमंत्री की इस पूजा को राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का मानना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी बंगाल की स्थानीय परंपराओं और खान-पान की विविधता का सम्मान करती है।
वहीं, ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की ओर से पहले भाजपा पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि वह बंगाल की संस्कृति और खान-पान को समझती नहीं है।
हालांकि, भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह हर राज्य की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी माहौल के बीच प्रधानमंत्री का यह कदम न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि इसके जरिए मतदाताओं तक एक व्यापक सांस्कृतिक संदेश पहुंचाने की भी कोशिश की गई है।
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