Last updated: June 9th, 2026 at 06:51 am

बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
शिवचंद्र राम का आरोप है कि उन्हें विधान परिषद (MLC) भेजने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अंतिम समय में उन्हें टिकट नहीं दिया गया। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने पार्टी के SC-ST प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
इस घटनाक्रम के बाद लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने भी शिवचंद्र राम के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इस फैसले को दुखद और निराशाजनक बताया।
तेज प्रताप यादव ने कहा कि शिवचंद्र राम लंबे समय से संगठन और समाज के लिए काम कर रहे हैं और उन्होंने सामाजिक समरसता और संत रविदास के विचारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनके साथ हुआ व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।
इसी बीच सोमवार को महागठबंधन की ओर से RJD उम्मीदवार सुनील सिंह ने MLC चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। इसके बाद शिवचंद्र राम की नाराजगी सार्वजनिक हो गई। मीडिया से बातचीत के दौरान वह भावुक हो गए और रो पड़े। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें विधान परिषद भेजेगी, लेकिन अंतिम समय में यह वादा पूरा नहीं किया गया।
नाराजगी के बावजूद शिवचंद्र राम ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि केवल अपने प्रकोष्ठ के पद से अलग हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अभी भी RJD के सक्रिय सदस्य बने रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, MLC उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम प्रमुखता से चर्चा में था, खासकर दलित समाज को प्रतिनिधित्व देने की संभावना के चलते। हालांकि अंतिम सूची में उनका नाम शामिल नहीं होने से उनके समर्थकों में भी असंतोष देखा जा रहा है।
इस्तीफे के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की भी खबर सामने आई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शिवचंद्र राम ने पार्टी नेतृत्व से मांग की है कि दलित, आदिवासी, पिछड़ा, अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर स्पष्ट और स्थायी नीति बनाई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने MLC चुनाव से पहले RJD के भीतर की राजनीतिक स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
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