Last updated: November 5th, 2026 at 12:33 pm

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कराने वाले आयोजकों और प्रायोजकों से विवादित बयान देने वाले कथावाचकों को मंच नहीं देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कुछ कथावाचक अपने बयानों के जरिए समाज में वैमनस्य फैलाते हैं। ऐसे लोगों को कार्यक्रमों में बुलाने वाले आयोजकों को भी जनता की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।
कथावाचकों को लेकर क्या बोले अखिलेश?
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि शासन-प्रशासन के साथ धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजकों और प्रायोजकों को भी ऐसे कथाकारों से दूरी बनानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी वेशभूषा और बोलचाल से कथावाचक दिखाई देते हैं, लेकिन कथा और प्रवचन को व्यवसाय का रूप दे चुके हैं।
सपा अध्यक्ष के मुताबिक, ऐसे लोग अपनी भौतिक उपलब्धियों का प्रदर्शन करते हैं और सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए विवादित बयान देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनके लिए धन ही धर्म बन गया है।
आयोजकों को भी नुकसान उठाने की चेतावनी
अखिलेश यादव ने कहा कि विवादित बयान देने वाले कथाकारों को राजनीतिक संरक्षण मिल सकता है, लेकिन धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कराने वाले लोगों को उसी शहर में जनता के बीच रहना पड़ता है। ऐसे में उनके बयानों से पैदा होने वाले सामाजिक तनाव का असर आयोजकों और प्रायोजकों पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालु विवादित बयानों को कार्यक्रम के आयोजकों और प्रायोजकों की सहमति से जोड़कर देख सकते हैं। इससे उनकी स्थानीय छवि खराब हो सकती है और उन्हें सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विद्वानों और अच्छे वक्ताओं को बुलाने की अपील
सपा प्रमुख ने आयोजकों से ऐसे लोगों को प्रोत्साहन नहीं देने की अपील की, जिनके बयान समाज और सनातन परंपरा के बीच दूरी बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कथाकारों को मंच देना ईशनिंदा में भागीदार बनने जैसा हो सकता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि देश में कई विद्वान और विचारक मौजूद हैं, जिन्हें वैदिक, औपनिषदिक ज्ञान और महाकाव्यों की अच्छी समझ है। उन्होंने धार्मिक आयोजनों में ऐसे संवेदनशील वक्ताओं को आमंत्रित करने की सलाह दी, जो सद्भावपूर्ण भाषा में अपनी बात रखें और जिनके विचार समाज व मानव जीवन को बेहतर बनाने में मददगार हों।
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