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भोजपुर एनकाउंटर पर सियासी संग्राम तेज, अश्विनी चौबे ने उठाए सवाल, कहा फर्जी मुठभेड़ की जांच हो

भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक विवाद
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भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी मुठभेड़ बताया है।

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    एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच जरूरी

    अश्विनी चौबे ने कहा कि यदि पुलिस चाहती तो भरत तिवारी को गिरफ्तार किया जा सकता था, लेकिन मुठभेड़ की कार्रवाई पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उनके हथियार जब्त कर उन्हें कानून के तहत जेल भेजा जाना चाहिए।

    भरत तिवारी सामाजिक कार्यकर्ता थे

    पूर्व केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि मृतक भरत तिवारी कोई अपराधी नहीं बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो स्थानीय स्तर पर जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे। उनके अनुसार, वे क्षेत्र में जल संकट और अन्य सार्वजनिक समस्याओं को लेकर सक्रिय थे। चौबे ने यह भी कहा कि जिस मुद्दे को लेकर भरत तिवारी काम कर रहे थे, उसकी भी अलग से जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    पीड़ित परिवार से मुलाकात और राजनीतिक बयानबाजी

    उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार से मिलने के दौरान उन्होंने यह पाया कि स्थानीय स्तर पर लोगों में नाराजगी है। साथ ही उन्होंने विपक्षी नेताओं की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। हालांकि इस पूरे मामले में अन्य राजनीतिक दलों की ओर से प्रतिक्रिया धीरे-धीरे सामने आ रही है, लेकिन अभी तक सभी पक्षों की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    सरकार के रुख पर भी टिप्पणी

    अश्विनी चौबे ने सरकार के रुख को लेकर कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू की गई है और संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि न्यायिक जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।

    उपवास की घोषणा

    उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे 26 जून को एक दिन के मौन उपवास पर बैठेंगे। उनका कहना है कि यह उपवास लोकतांत्रिक मूल्यों और आपातकाल के दौर को याद करने के उद्देश्य से किया जाएगा।

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