Last updated: June 24th, 2026 at 04:07 am

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल के हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख की बात करते हुए मंत्री ने कहा कि जब तक मंत्री खुद ईमानदार नहीं होगा, तब तक व्यवस्था में नीचे तक प्रभावी कार्रवाई संभव नहीं है। उनके इस बयान के बाद विपक्ष के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ दो मोर्चों पर काम करने की बात
दिलीप जायसवाल ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य विभाग में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। उन्होंने कहा कि किसी भी मंत्री की ईमानदारी ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है और यदि नेतृत्व साफ-सुथरा होगा, तभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का साहस और अधिकार प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि उनका दूसरा लक्ष्य भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत किया जा सके।
बयान के बाद उठने लगे कई सवाल
मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इससे पूर्व इस विभाग का नेतृत्व करने वाले मंत्रियों की कार्यशैली पर अप्रत्यक्ष सवाल खड़े होते हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान से यह संदेश भी जाता है कि विभाग में लंबे समय से व्याप्त भ्रष्टाचार पर पहले अपेक्षित स्तर पर नियंत्रण नहीं हो सका। हालांकि, इस विषय पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लंबे समय से भाजपा के पास रहा है विभाग
गौरतलब है कि बिहार में वर्ष 2005 से विभिन्न अवधियों में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग मुख्य रूप से भाजपा के पास रहा है। दिलीप जायसवाल से पहले विजय कुमार सिन्हा, संजय सरावगी, रामसूरत राय और राम नारायण मंडल जैसे नेता इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। महागठबंधन सरकार के दौरान यह विभाग राजद के हिस्से में गया था, जहां ललित यादव और आलोक कुमार मेहता ने इसकी कमान संभाली थी।
भ्रष्टाचार पर सख्ती के दावों पर नजर
राजस्व विभाग को लेकर अक्सर जमीन संबंधी विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों की चर्चा होती रही है। ऐसे में दिलीप जायसवाल के ताजा बयान को विभागीय सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग में चल रहे सुधार अभियान का जमीनी असर कितना दिखाई देता है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के दावे किस हद तक सफल हो पाते हैं।
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