Last updated: June 24th, 2026 at 04:14 am

बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्त कार्रवाई के बीच वैशाली जिले से जुड़े एक चर्चित मामले में विशेष अदालत ने तत्कालीन महिला सब-इंस्पेक्टर पूनम कुमारी को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (विजिलेंस) अतुल कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया।
2024 में रिश्वत लेते हुए हुई थी गिरफ्तारी
मामला वर्ष 2024 का है, जब विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने हाजीपुर टाउन थाना में तैनात उप-निरीक्षक पूनम कुमारी को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया और जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया।
बस रिलीज कराने के नाम पर मांगी गई थी रकम
जांच के दौरान सामने आया कि नितेश बस सर्विस के प्रबंधक पंकज कुमार द्विवेदी से एक बस को डीटीओ कार्यालय से रिलीज कराने से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद SVU ने जाल बिछाकर आरोपी अधिकारी को उनके आवास से ही नकदी के साथ गिरफ्तार कर लिया था।
विशेष अदालत ने माना दोषी
विशेष मामला संख्या 17/2024 की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पूनम कुमारी को दोषी पाया। अदालत ने उन्हें तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जुर्माना नहीं भरने पर बढ़ेगी सजा
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करती हैं, तो उन्हें तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का संदेश
इस फैसले को भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। विशेष निगरानी इकाई की कार्रवाई और अदालत के फैसले ने यह संदेश दिया है कि सरकारी पद पर रहते हुए रिश्वतखोरी के मामलों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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