Last updated: July 27th, 2026 at 09:41 am

सोशल मीडिया पर इन दिनों E20 जनता पार्टी नाम का एक डिजिटल अभियान तेजी से चर्चा में है। X (पूर्व में ट्विटर) और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर इस अभियान से बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं, जिसके चलते इसके फॉलोअर्स लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि, यह कोई राजनीतिक दल या पंजीकृत संगठन नहीं है, बल्कि खुद को आम नागरिकों और वाहन उपभोक्ताओं की आवाज बताने वाला एक ऑनलाइन अभियान है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य E20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं के अधिकारों और विकल्पों की मांग उठाना है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सरकार E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल उपलब्ध कराना चाहती है तो इसके साथ 100 प्रतिशत शुद्ध (इथेनॉल-फ्री) पेट्रोल का विकल्प भी सभी पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध होना चाहिए, ताकि वाहन मालिक अपनी जरूरत और वाहन निर्माता की सलाह के अनुसार ईंधन का चुनाव कर सकें।
सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे पोस्ट और वीडियो में दावा किया जा रहा है कि वाहन करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरत और आजीविका का साधन हैं। ऐसे में ईंधन की गुणवत्ता, माइलेज और इंजन की कार्यक्षमता का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है। अभियान से जुड़े लोग इसी मुद्दे पर पारदर्शिता और विकल्प की मांग कर रहे हैं।
अभियान की प्रमुख मांगें
सभी पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ 100% इथेनॉल-फ्री पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
वाहन निर्माता की सिफारिश के अनुसार ईंधन चुनने की सुविधा मिले।
उपभोक्ताओं पर किसी एक प्रकार के ईंधन का विकल्प अनिवार्य रूप से न थोपा जाए।
वाहन मालिकों को अपनी आवश्यकता के अनुसार फ्यूल चुनने की स्वतंत्रता दी जाए।
E20 पेट्रोल और उसके प्रभावों को लेकर सरकार पूरी पारदर्शिता बनाए रखे।
अभियान से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल का दावा है कि यह पूरी तरह स्वतंत्र नागरिक पहल है और इसका किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से कोई संबंध नहीं है। अभियान का उद्देश्य केवल उपभोक्ताओं के अधिकारों और ईंधन विकल्पों पर सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देना है।
हाल के दिनों में इस अभियान की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया पर इसके फॉलोअर्स में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और E20 नीति को लेकर बहस भी तेज हो गई है। कुछ यूजर्स ने इसकी तुलना अन्य वायरल डिजिटल अभियानों से भी की है, हालांकि अभियान संचालकों का कहना है कि उनका फोकस केवल ईंधन नीति और उपभोक्ताओं के अधिकारों तक सीमित है।
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