Last updated: July 27th, 2026 at 10:21 am

पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक चिंतक सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सीधे महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पहुंचे। उन्होंने पत्नी गीतांजलि के साथ बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि अहिंसा एवं सत्याग्रह का मार्ग आज भी समाज और लोकतंत्र में सकारात्मक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
राजघाट पहुंचकर वांगचुक ने कहा कि उनका पहला उद्देश्य महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना था। उन्होंने कहा कि लंबे अनशन और आंदोलन के बाद मिली सफलता ने एक बार फिर यह साबित किया है कि शांतिपूर्ण संघर्ष की शक्ति आज भी उतनी ही प्रभावी है, जितनी स्वतंत्रता आंदोलन के समय थी।
उन्होंने कहा कि कई लोग मानते हैं कि वर्तमान समय में अहिंसक आंदोलन प्रभावी नहीं होते, लेकिन उनका अनुभव इससे अलग रहा। वांगचुक के अनुसार, यदि संघर्ष शांतिपूर्ण हो और उसमें दूसरों को नुकसान पहुंचाने के बजाय स्वयं कठिनाइयों का सामना किया जाए, तो उसका असर समाज और व्यवस्था दोनों पर पड़ता है।
अस्पताल से जारी अपने वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने बताया कि अब उनकी तबीयत पहले से बेहतर है और स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि उपचार के बाद वह सामान्य रूप से भोजन कर रहे हैं और शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा लौट रही है।
वांगचुक ने आंदोलन के दौरान सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देशभर से मिले समर्थन और युवाओं की शांतिपूर्ण भागीदारी ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से भविष्य में भी लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीकों से अपनी बात रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज में स्थायी बदलाव संवाद, शांति और धैर्य के माध्यम से ही संभव है। वांगचुक ने सभी समर्थकों को धन्यवाद देते हुए देश में शांति, एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने का संदेश दिया।
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